वाराणसी
अपने अनुभवों से क्षय रोगियों का हौसला बढ़ा रहे टीबी चैंपियन
वाराणसी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग और वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स संस्था इम्पैक्ट इंडिया प्रोजेक्ट के तहत सामुदायिक स्तर पर टीबी जागरूकता अभियान चला रही है। इस अभियान में “टीबी चैंपियन” अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर न केवल क्षय रोगियों के उपचार में मदद करने के लिए तैयार किया जा रहा है, बल्कि उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है। सही समय पर उपचार और नियमित दवाओं का सेवन कर कोई भी व्यक्ति इस बीमारी से पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।

टीबी चैंपियन: प्रेरणा के स्रोत
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीयूष राय ने बताया कि “टीबी चैंपियन” वे लोग हैं, जिन्होंने खुद टीबी को मात दी है और अब दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। चैंपियन बनने के लिए इन्हें मानक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जाता है। वे न केवल टीबी मरीजों को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं, बल्कि उनके परिवारों को भी सहयोग प्रदान करते हैं।

जनपद में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिंडरा में 34, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ागांव में 24 और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिरईगांव में 24 टीबी चैंपियन को प्रशिक्षित किया गया है। कुल 82 प्रशिक्षित चैंपियन अपने-अपने क्षेत्रों में “आयुष्मान आरोग्य मंदिर” के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर स्कूलों, सामुदायिक बैठकों और रोगी-प्रदाता बैठकों में जागरूकता फैला रहे हैं।

रोगियों को फिर से इलाज के लिए प्रेरित कर रहे चैंपियन
टीबी चैंपियन न केवल जागरूकता फैला रहे हैं, बल्कि ऐसे रोगियों से मिल रहे हैं, जिन्होंने इलाज बीच में छोड़ दिया है। अपनी कहानी सुनाकर वे इन रोगियों को फिर से इलाज शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके अलावा, जो मरीज टीबी का इलाज पूरा कर चुके हैं, उन्हें टीबी चैंपियन बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इन चयनित लोगों को एक दिवसीय प्रशिक्षण देकर टीबी मुक्त भारत अभियान में शामिल किया जा रहा है। टीबी चैंपियन समुदाय के बीच एक रोल मॉडल के रूप में काम कर रहे हैं और टीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
