गोरखपुर
Hormuz Strait पर संकट से भारत की 50% तेल सप्लाई खतरे में, सोना-चांदी महंगे होने के आसार
गोरखपुर/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Israel द्वारा Iran की राजधानी Tehran समेत कई शहरों पर हमले के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। अगर यह टकराव लंबा खिंचता है और Hormuz Strait बंद होता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से आयात करता है। केपलर (Kpler) के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक, भारत रोजाना करीब 26 लाख बैरल कच्चा तेल होर्मुज रूट से मंगवाता है।
जनवरी-फरवरी के आंकड़ों में भारत के कुल मासिक तेल आयात का करीब आधा हिस्सा इसी रास्ते से आया है, जो नवंबर-दिसंबर 2025 के 40% के मुकाबले अधिक है।
होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है। भारत सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि ईरान इस मार्ग को अवरुद्ध करता है या तेल ठिकानों पर हमले बढ़ते हैं, तो सप्लाई चेन बाधित हो सकती है और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
तेल महंगा होने का सीधा असर भारत में महंगाई पर पड़ेगा। परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी होंगी और शेयर बाजार में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोना और चांदी की मांग बढ़ती है। ऐसे में इनकी कीमतों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा भारत का नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट भी प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत के कुल निर्यात का 10% से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा है। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन संकट गहराने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
