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Budget 2026 : 8th Pay Commission को मिला फंड, केंद्रीय कर्मचारियों-पेंशनर्स को बड़ी उम्मीद

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सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा की तैयारी, बजट में 8वें वेतन आयोग के लिए अलग लाइन

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 में केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण संकेत सामने आए हैं। बजट में 8th Pay Commission से संबंधित खर्चों के लिए अलग से प्रावधान किया गया है, जिससे वेतन और पेंशन में भविष्य में संशोधन की प्रक्रिया के औपचारिक रूप से आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की डिमांड फॉर ग्रांट्स में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के नाम से स्पष्ट बजट लाइन दिखाई दी है। बजट 2026-27 में आयोग के कार्यों के लिए कुल 23.42 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें से 21.32 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 2.10 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के रूप में रखे गए हैं। यह राशि आयोग के गठन, कार्यालय संचालन, स्टाफ, शोध और प्रशासनिक कार्यों पर खर्च की जाएगी, न कि सीधे वेतन या पेंशन बढ़ोतरी के लिए।

पिछले एक वर्ष के घटनाक्रम पर नजर डालें तो 15 जनवरी 2025 को आयोग के गठन की आधिकारिक घोषणा हुई, 28 अक्टूबर 2025 को इसके गठन का ऐलान किया गया और 3 नवंबर 2025 को इसका टर्म ऑफ रेफरेंस जारी किया गया। इसके बाद 20 जनवरी 2026 को आयोग को आधिकारिक कार्यालय मिला, 28 जनवरी 2026 को चीफ विजिलेंस अधिकारी की नियुक्ति हुई और अब 1 फरवरी 2026 को बजट में इसके लिए धनराशि आवंटित की गई है।

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इस प्रावधान के साथ यह संकेत मिला है कि सरकार आने वाले समय में 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी संरचना की समीक्षा करने जा रही है। आम तौर पर वेतन आयोग महंगाई, जीवन-यापन की लागत, कर्मचारियों की आवश्यकताओं और सरकार की वित्तीय स्थिति के आधार पर अपनी सिफारिशें देता है, जिनके अनुसार बेसिक वेतन, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन में बदलाव किए जाते हैं।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इसका अर्थ यह है कि भविष्य में बेसिक वेतन में वृद्धि की संभावना बन सकती है, जिससे महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और अन्य भत्तों पर भी असर पड़ेगा। वहीं पेंशनर्स के लिए नई सिफारिशें लागू होने पर बेसिक और फैमिली पेंशन में बढ़ोतरी संभव है।

ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पेटल ने इस बजटीय प्रावधान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आयोग के कामकाज के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा 23.42 करोड़ रुपये की व्यवस्था किए जाने से उम्मीद है कि अब आयोग तेजी से कार्य शुरू करेगा और कर्मचारियों के हित में 200 दिनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कर भारत सरकार को सौंपेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग के गठन और फंड जारी करने में पहले ही देरी हो चुकी है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा है।

फिलहाल बजट में दिया गया यह प्रावधान केवल आयोग के संचालन से जुड़ा शुरुआती कदम है, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो गया है कि आठवें वेतन आयोग की प्रक्रिया अब कागजों से आगे बढ़ चुकी है और आने वाले वर्षों में इसकी सिफारिशें ही तय करेंगी कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय में कितनी बढ़ोतरी होगी।

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