वाराणसी
BHU : छात्र की मौत से उबाल, कुलपति आवास घेरा; ट्रॉमा सेंटर पर लापरवाही के आरोप
वाराणसी। बीएचयू परिसर में एक छात्र की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद आक्रोश भड़क उठा है। कृषि विज्ञान संस्थान के एमएससी के छात्र सूरज प्रताप सिंह की उपचार के दौरान हुई मृत्यु से क्षुब्ध छात्रों ने रविवार दोपहर कुलपति आवास के सामने धरना शुरू कर दिया। परिसर में शोक के साथ-साथ रोष का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, सूरज प्रताप सिंह अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र थे और मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद के निवासी थे। बीती रात वह बाइक से हास्टल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान परिसर में उनकी बाइक डिवाइडर से टकरा गई। बाइक पर सवार दो अन्य छात्रों को हल्की चोटें आईं, जबकि सूरज गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद छात्रों ने ट्रॉमा सेंटर प्रशासन और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि समय पर समुचित उपचार नहीं मिला और प्रशासनिक लापरवाही के कारण साथी छात्र की जान चली गई। छात्रों का आरोप है कि ड्यूटी ऑफिसर मौके पर मौजूद नहीं थीं और फोन कॉल का भी जवाब नहीं दिया गया। यह भी कहा गया कि आपात स्थिति में कागजी प्रक्रिया और आईडी सत्यापन में अनावश्यक देरी की गई, जिससे इलाज में विलंब हुआ।
छात्रों ने कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक को पत्र सौंपकर मांग की है कि जांच के बाद संबंधित अधिकारियों से लिखित रूप में लापरवाही स्वीकार कराई जाए और आरोपित डॉक्टर को तत्काल निलंबित किया जाए। इसके साथ ही मृतक के परिजनों को दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता या परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई गई है।
धरने पर बैठे छात्रों ने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में बिना कागजी औपचारिकताओं और पहचान पत्र की बाध्यता के तुरंत इलाज शुरू किया जाए। साथ ही परिसर की सड़कों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षित बैरियर लगाए जाने की मांग की गई है, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
