गोरखपुर
संस्कार, समर्पण और सपनों की सजीव तस्वीर बना सेंट जेवियर्स का वार्षिकोत्सव
गोरखपुर। सेंट जेवियर्स स्कूल, ताल नादोर, गोरखपुर में रविवार को आयोजित वार्षिकोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और समर्पण की सजीव अभिव्यक्ति बनकर उभरा। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक मृणाल दूबे द्वारा किया गया, मानो ज्ञान की ज्योति ने पूरे परिसर को आलोकित कर दिया हो।

मंच पर जब नन्हे-मुन्ने बच्चों ने कदम रखा, तो हर प्रस्तुति में मासूमियत, मेहनत और आत्मविश्वास की अद्भुत झलक दिखाई दी। नृत्य की थिरकन, गीतों की मधुरता, भाषण की गंभीरता और समूह प्रस्तुतियों की एकजुटता ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हर बच्चा अपने भीतर छिपे सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहा हो।
इन मनमोहक प्रस्तुतियों के पीछे उन शिक्षक-शिक्षिकाओं का अथक परिश्रम और समर्पण छिपा है, जिनकी मेहनत ने इन नन्हे कलाकारों को मंच तक पहुंचाया। सच ही कहा जाए तो बलिहारी हैं उन गुरुजनों की, जिनकी तपस्या और मार्गदर्शन ने बच्चों को इस काबिल बनाया कि वे मंच पर अपनी प्रतिभा का ऐसा अनुपम प्रदर्शन कर सके। उनकी निष्ठा ही इस सफलता की असली आधारशिला है।

वहीं, अभिभावकों का योगदान भी इस अवसर पर अत्यंत सराहनीय रहा। अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर बच्चों का उत्साहवर्धन करने पहुंचे अभिभावक वास्तव में इस आयोजन की आत्मा बन गए। उनके चेहरे पर गर्व और आंखों में चमक इस बात का प्रमाण थी कि बच्चों की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि उनके लिए कितनी मायने रखती है।

इस पूरे आयोजन में एक भावपूर्ण स्मरण स्वर्गीय शिवानन्द दूबे का भी रहा, जिनके आदर्शों और संस्कारों की छाया आज भी विद्यालय के हर कोने में महसूस की जा सकती है। उनके पदचिन्हों पर चलते हुए विद्यालय के प्रबंधक श्री मृणाल दूबे न केवल संस्था का कुशल संचालन कर रहे हैं, बल्कि शिक्षा के साथ संस्कारों की अलख भी जगा रहे हैं। यह आयोजन उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में भी देखा गया।

विद्यालय की प्रधानाचार्या सुमन दूबे ने सभी छात्र-छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा शिक्षकगण एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन कक्षा 11 के छात्र मयंक एवं कक्षा 10 की छात्रा मोनिका ने आत्मविश्वास और सहजता के साथ किया, जिसने पूरे आयोजन को एक सुंदर लय प्रदान की।

सायं 5 बजे से शुरू होकर रात 8 बजे तक चले इस कार्यक्रम ने हर उपस्थित व्यक्ति के हृदय में एक अमिट छाप छोड़ी। यह वार्षिकोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कार, शिक्षा और सामूहिक प्रयासों की ऐसी कहानी बन गया, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
