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गोरखपुर

कृष्ण-रुक्मिणी विवाह व जरासंध वध की लीलाओं से भावविभोर हुए श्रद्धालु

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मिश्रवलिया में श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य आयोजन

गोरखपुर। जनपद की तहसील सहजनवा अंतर्गत ग्राम सभा मिश्रवलिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम संगम बनी हुई है। यह पावन आयोजन दिनांक 14 फरवरी 2026 से प्रारम्भ होकर 22 फरवरी 2026, रविवार को भव्य समापन की ओर अग्रसर है। कथा का प्रवचन अयोध्या से पधारे सुप्रसिद्ध संत श्री जयराम दास जी महाराज के श्रीमुख से हो रहा है, जिनकी ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण व्याख्या ने सम्पूर्ण क्षेत्र को भक्तिरस में सराबोर कर दिया है।

कथा स्थल पर प्रतिदिन प्रातः से ही श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे वातावरण भक्ति से ओतप्रोत होता चला जाता है। भजन-कीर्तन, शंखनाद और हरि नाम संकीर्तन के बीच श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर नाचने-झूमने लगते हैं। संत श्री जयराम दास जी महाराज ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह, जरासंध वध तथा इनके मध्य घटित दिव्य लीलाओं का अत्यंत भावनात्मक और सरल शब्दों में वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव जीवन को सत्य, धर्म और प्रेम का मार्ग दिखाती है।

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आज की कथा में विशेष रूप से श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। प्रेम, समर्पण और विश्वास की इस अलौकिक कथा ने उपस्थित जनसमूह के हृदय को छू लिया। वहीं जरासंध वध का वर्णन सुनकर श्रोताओं ने अधर्म पर धर्म की विजय का जयघोष किया। महाराज श्री ने समझाया कि अहंकार और अन्याय चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म के सामने उसका पतन निश्चित है।

इस भव्य आयोजन के मुख्य यजमान श्री ब्रह्मदेव मिश्र एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती विन्ध्वासिनी देवी हैं, जिनके सत्प्रयास से यह पुण्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है। मुख्य यजमान के उपरांत क्रमबद्ध रूप से परिवार के अन्य सदस्यों में श्री अखिलेश्वर मिश्र एवं उनकी पत्नी श्रीमती सावित्री देवी, श्रीमती प्रेमशिला, श्री केशव मिश्र, श्री अश्विनी मिश्र, श्री विवेक मिश्रा, श्री सर्वेश मिश्र, श्री आदर्श मिश्र, श्री शिवाग मिश्र तथा समस्त मिश्र परिवार का विशेष योगदान सराहनीय है। परिवार के प्रत्येक सदस्य ने सेवा, भक्ति और समर्पण भाव से आयोजन की व्यवस्थाओं को संभाला।

कथा के दौरान ग्रामवासियों एवं दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद, जलपान और बैठने की उत्तम व्यवस्था की गई है। पूरा ग्राम सभा क्षेत्र धार्मिक उल्लास से जगमगा उठा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो स्वयं श्रीकृष्ण अपनी लीलाओं के माध्यम से भक्तों के बीच विराजमान हों।

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समापन दिवस 22 फरवरी को हवन, पूर्णाहुति और भंडारे के साथ यह आयोजन पूर्ण होगा। ग्राम मिश्रवलिया की जनता इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर को जीवन भर स्मरण रखने की बात कह रही है। श्रीमद् भागवत कथा ने न केवल भक्ति का संदेश दिया है, बल्कि समाज में सद्भाव, एकता और धर्मनिष्ठ जीवन की प्रेरणा भी प्रदान की है।

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