गोरखपुर
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जीटीएसएस का भव्य उद्घाटन
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशंस’ (जीटीएसएस-2026) का प्रथम दिवस अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया और हरित एवं सतत प्रौद्योगिकी के भावी आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन का उद्घाटन सत्र दीप प्रज्वलन तथा अतिथियों के गरिमामय स्वागत से प्रारंभ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद (प्रयागराज) के निदेशक प्रो. मुकुल एस. सुताओने ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में उभरती प्रौद्योगिकियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला तथा अकादमिक-उद्योग सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन के मुख्य संरक्षक प्रो. जे.पी. सैनी, कुलपति, एमएमएमयूटी तथा प्रो. एस.एन. सिंह, निदेशक, अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान, ग्वालियर ने आयोजन का कुशल मार्गदर्शन किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद के प्रो. सतीश कुमार सिंह की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक समृद्ध बनाया।
सम्मेलन के जनरल चेयर प्रो. राकेश कुमार (कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग) ने स्वागत भाषण में सम्मेलन की थीम ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशंस’ की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ऊर्जा दक्षता, स्मार्ट ग्रिड, हरित संचार प्रणाली, पर्यावरणीय निगरानी तथा एआई-आधारित समाधान सतत विकास के लिए अपरिहार्य हैं। यह मंच शोधकर्ताओं को नवाचारों को व्यावहारिक समाधानों में रूपांतरित करने का अवसर प्रदान करता है।
मुख्य संरक्षक प्रो. जे.पी. सैनी ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि हरित प्रौद्योगिकी मात्र एक शोध विषय नहीं, अपितु मानवता के भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें ऊर्जा संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में ठोस समाधान प्रस्तुत करने वाले नवाचारों को प्रोत्साहन देना चाहिए। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा डेटा-आधारित विश्लेषण को सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण बताते हुए इनके एकीकरण पर बल दिया।

प्रो. एस.एन. सिंह ने अपने व्याख्यान में स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन, स्मार्ट ग्रिड तथा डिजिटल पावर सिस्टम्स की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने उन्नत डिजिटल तकनीकों एवं ऑटोमेशन के माध्यम से ऊर्जा वितरण प्रणाली को अधिक कुशल, विश्वसनीय तथा पर्यावरण-अनुकूल बनाने के उपाय सुझाए।
प्रो. सतीश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हरित प्रौद्योगिकी आज वैश्विक आवश्यकता बन चुकी है तथा शैक्षणिक संस्थानों का दायित्व है कि वे अनुसंधान को व्यावहारिक समाधानों में परिवर्तित करें। उन्होंने ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण तथा स्मार्ट ग्रिड तकनीकों के माध्यम से सतत विकास को गति प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच युवा शोधकर्ताओं को वैश्विक विशेषज्ञों से सीखने तथा नए सहयोग के अवसर प्रदान करते हैं।
तकनीकी सत्रों के बारे में जानकारी देते हुए प्रो. (डॉ.) प्रभाकर तिवारी (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग) ने बताया कि प्रथम दिवस पर कुल 154 ऑफलाइन शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों में स्वच्छ ऊर्जा, हरित आईओटी, स्मार्ट सिटी, पर्यावरणीय डेटा एनालिटिक्स तथा एआई-आधारित सस्टेनेबल मॉडल जैसे विषय प्रमुख रहे। प्रतिभागियों ने शोध-आधारित चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी निभाई तथा सार्थक संवाद स्थापित किया।
सम्मेलन के उद्घाटन कीनोट सत्र अत्यंत प्रेरणादायक रहा, जिसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने हरित प्रौद्योगिकी तथा सतत समाधानों के विविध आयामों पर अपने विचार साझा किए।
प्रथम कीनोट वक्ता प्रो. दिमित्रियोस ए. कर्रास (एथेंस, ग्रीस) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग तथा डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से ऊर्जा खपत अनुकूलन, स्मार्ट ग्रिड प्रबंधन, जल संसाधन संरक्षण तथा कार्बन फुटप्रिंट में कमी जैसे क्षेत्रों में संभावित सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यूरोप में विकसित हो रहे स्मार्ट एवं हरित डिजिटल इकोसिस्टम के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि भविष्य की सतत अर्थव्यवस्था तकनीक-संचालित तथा डेटा-आधारित होगी। उन्होंने अकादमिक शोध को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
इसके पश्चात, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के प्रो. मानव आर. भटनागर ने 5जी/6जी नेटवर्क, ऊर्जा-कुशल वायरलेस संचार, लो-पावर आईओटी डिवाइसेस तथा स्मार्ट सिटी अनुप्रयोगों में हरित संचार प्रणालियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने भविष्य के संचार नेटवर्क को उच्च गति के साथ-साथ न्यूनतम ऊर्जा खपत तथा पर्यावरणीय प्रभाव को ध्यान में रखकर डिजाइन करने की आवश्यकता बताई तथा शोधकर्ताओं को हरित प्रोटोकॉल एवं ऊर्जा-संवेदी नेटवर्क आर्किटेक्चर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
अंतिम कीनोट वक्ता प्रो. घनश्याम सिंह (यूनिवर्सिटी ऑफ जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका) ने नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण, स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड तथा डिजिटल पावर सिस्टम्स के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सौर एवं पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ स्रोतों को उन्नत नियंत्रण तकनीकों तथा एआई-आधारित पूर्वानुमान मॉडल से जोड़कर ऊर्जा आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय एवं टिकाऊ बनाने के उपाय सुझाए।
कीनोट सत्र ने सम्मेलन की थीम को सार्थक दिशा प्रदान की तथा प्रतिभागियों को नवाचार, सहयोग तथा व्यावहारिक अनुसंधान की ओर प्रोत्साहित किया।
सम्मेलन चेयर/कन्वीनर डॉ. सत्य प्रकाश यादव ने मुख्य अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों, आयोजन समिति के सदस्यों तथा सहयोगी स्टाफ के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा जताई कि सम्मेलन के शेष सत्र भी इसी उत्साह एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ संपन्न होंगे।
सम्मेलन के सफल संचालन में प्रो. (डॉ.) प्रभाकर तिवारी (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग), डॉ. राजन मिश्रा (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग), डॉ. सत्य प्रकाश यादव तथा डॉ. बिंदेश्वर सिंह ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रथम दिवस ने ज्ञान-विनिमय, नवाचार तथा वैश्विक सहयोग की मजबूत आधारशिला रखी। जीटीएसएस-2026 का यह आयोजन छात्रों, शोधकर्ताओं तथा उद्योग विशेषज्ञों के लिए हरित एवं सतत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए क्षितिज स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हो रहा है।
