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वाराणसी

डमरू की गूंज और मंगल गीतों के बीच काशी में होगी बाबा की पारंपरिक हल्दी रस्म

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वाराणसी। महाशिवरात्रि से पूर्व काशी में बाबा विश्वनाथ की हल्दी रस्म को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही इस पारंपरिक आयोजन को भव्य रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव की पहली मंगल बेला के रूप में आयोजित होने वाली यह हल्दी रस्म 13 फरवरी को संपन्न होगी, जिसमें श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी रहने की संभावना है।

इस वर्ष विशेष रूप से बाबा को अर्पित की जाने वाली हल्दी ज्योतिर्लिंग श्री त्रयंबकेश्वर, नासिक से विद्वान पुजारियों द्वारा काशी लाई जाएगी। यह हल्दी धार्मिक परंपराओं के अनुरूप विधिवत पूजन के बाद बाबा को अर्पित की जाएगी। आयोजन के दौरान पंच बदन बाबा को गाजे-बाजे के साथ भव्य रूप से सजाया जाएगा और काशी की गलियों में डमरू की गूंज सुनाई देगी।

हल्दी रस्म के इस पावन अवसर पर सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ, काशी के सदस्य और बाबा सारंगनाथ के भक्त ससुराल पक्ष के रूप में शामिल होंगे। श्रद्धालु एकत्रित होकर बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी आस्था प्रकट करेंगे। इस आयोजन को अद्वितीय और स्मरणीय बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।

भक्तों के लिए ड्रेस कोड भी निर्धारित किया गया है। सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे पीले रंग के वस्त्र धारण कर कार्यक्रम में शामिल हों, जिससे इस रस्म की गरिमा और भव्यता और बढ़ सके। कार्यक्रम 13 फरवरी की सायं छह बजे से टेढ़ीनीम स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के आवास पर आयोजित होगा।

मुख्य आकर्षण के रूप में काशी की महिलाएं पारंपरिक वैवाहिक एवं शिव गीतों के साथ हल्दी रस्म का आयोजन करेंगी। मंगल वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच संपन्न होने वाला यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा।

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इस भव्य आयोजन का संचालन शिव बारात समिति, वाराणसी द्वारा किया जा रहा है। निवेदक के रूप में सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ, काशी तथा महादेव के ससुराल पक्ष एवं सारंगनाथ महादेव के समस्त तिलकहरु भक्तगण शामिल हैं। सभी संबंधित संस्थाएं और श्रद्धालु मिलकर आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।

बाबा विश्वनाथ की हल्दी रस्म न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक परंपरा और विरासत को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है। इस आयोजन के माध्यम से काशी की धार्मिकता और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। आयोजकों ने सभी भक्तों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस पावन अवसर के साक्षी बनें और बाबा के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें।

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