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अमेरिकी टैरिफ घटते ही पूर्वांचल के निर्यातकों में जगी नई उम्मीद
अमेरिका से फिर खुलेंगे व्यापार के रास्ते, निर्यातकों को नए ऑर्डर की उम्मीद
वाराणसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के फैसले से पूर्वांचल के निर्यातकों में नई उम्मीद जगी है। इस फैसले के बाद वाराणसी से लेकर भदोही और मिर्जापुर तक के उद्यमियों और व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से अमेरिका के साथ ठप पड़े व्यापारिक संबंधों में अब फिर से गति आने की संभावना जताई जा रही है।
निर्यातकों का कहना है कि टैरिफ में कटौती से व्यापार की लागत कम होगी और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी। भदोही और मिर्जापुर अपने कालीन, हस्तशिल्प और बुनाई उद्योग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं। वहीं वाराणसी की सिल्क साड़ियां और अन्य वस्त्र उत्पाद भी विदेशों में खास पहचान रखते हैं।
कालीन कारोबारी विजय कपूर के अनुसार, इन तीन जिलों से हर साल लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता है, जिसमें करीब 8000 करोड़ रुपये का व्यापार अमेरिका से जुड़ा रहता है। पहले टैरिफ बढ़ने के बाद अमेरिकी खरीदारों ने महंगे दामों के कारण भारतीय सामान खरीदना कम कर दिया था। इससे वाराणसी की सिल्क साड़ियां, भदोही के कालीन और टेक्सटाइल उत्पादों के कई बड़े ऑर्डर अधर में लटक गए थे।
उद्यमियों का कहना है कि अधिक शुल्क के कारण कई कारखाने बंद होने की स्थिति में पहुंच गए थे और बड़ी संख्या में कारीगर बेरोजगार हो गए थे। अब टैरिफ में कमी के बाद उद्योगों को फिर से संजीवनी मिलने की उम्मीद है। कृषि यंत्र निर्यातक राजेश सिंह के मुताबिक, अमेरिका के खरीदारों से दोबारा बातचीत शुरू हो गई है और नए ऑर्डर मिलने की संभावना बन रही है।
पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष रघु मेहरा का कहना है कि टैरिफ पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और अभी भी 18 प्रतिशत शुल्क का असर उद्योगों पर बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद यह फैसला राहत देने वाला है। इससे व्यापार को नई दिशा मिलेगी और टूटी हुई सप्लाई चेन को फिर से जोड़ा जा सकेगा।
निर्यातकों के अनुसार, भदोही और मिर्जापुर की अर्थव्यवस्था का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को होने वाले निर्यात पर निर्भर करता है। टैरिफ में कटौती से बनारसी साड़ियां, चादरें, कुशन कवर और जरी-जरदोजी जैसे उत्पादों को नया बाजार मिलने की उम्मीद है। उद्योग जगत का मानना है कि आने वाले समय में इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बंद पड़ी इकाइयों में फिर से रौनक लौटेगी।
