गोरखपुर
सनातन मूल्यों पर मंडराता संकट: आचरण और आदर्श के बीच बढ़ती दूरी
गोरखपुर। आज का दौर सनातन धर्म के लिए चिंतन और आत्ममंथन का है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक सनातन धर्म के प्रवक्ताओं की भरमार दिखाई देती है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे पुरुषार्थों की चर्चा तो खूब होती है, परंतु उनके अनुरूप आचरण का अभाव समाज को भीतर से कमजोर कर रहा है। यही वे मूल मूल्य हैं, जिनकी रक्षा के लिए युग-युग में परमात्मा ने अवतार लिया और जिनका स्मरण हम “विप्र, धेनु, सुर, संत हित” जैसे वाक्यों में करते आए हैं।
दुर्भाग्य यह है कि आज वही सनातन मूल्य जाति आधारित राजनीति, संकीर्ण स्वार्थ और दिखावटी राष्ट्रवाद की परिक्रमा तक सीमित होते जा रहे हैं। संतों के नाम पर, संस्कृति के नाम पर और धर्म की आड़ में कार्य करने वाले अनेक समर्पित लोग भीतर ही भीतर पीड़ा और निराशा से जूझ रहे हैं। यह प्रश्न समाज के सामने खड़ा है कि क्या हमने अपने जीवन के 10, 20 या 40 वर्ष इसी विखंडन को देखने के लिए समर्पित किए थे?
इस वैचारिक संघर्ष के बीच गोरखपुर के प्रतिष्ठित लोकगायक, शिक्षक और सांस्कृतिक साधक श्री बृज किशोर तिवारी उर्फ गुलाब तिवारी, जो दूरदर्शन गोरखपुर एवं आकाशवाणी रेडियो चैनल पर लोकगीतों के सम्राट माने जाते हैं, लगातार अपने गीतों और विचारों के माध्यम से सनातन संस्कृति के मूल स्वरूप को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि सनातन केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि आचरण और समाज निर्माण का जीवन दर्शन है।
इतिहास साक्षी है कि जब-जब सनातन समाज संगठित रहा है, तब-तब भारत विश्वगुरु बना है और जब समाज बंटा है, तब विदेशी आक्रांताओं और अधर्म ने अवसर पाया है। समाज और संगठनों के नियंताओं से यही प्रार्थना है कि हजार वर्ष पूर्व जैसी परिस्थितियाँ दोबारा न बनने दें।
लाखों पूर्वजों के बलिदान से सुरक्षित यह सनातन समाज आज एकता, समरसता और पुरुषार्थ की पुनर्स्थापना चाहता है। मां भारती को परम वैभव के शिखर पर पहुँचाने और भारत को पुनः जगद्गुरु बनाने का यही एकमात्र मार्ग है। इसी में राष्ट्र, समाज और सनातन का सच्चा कल्याण निहित है।
