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वाराणसी

मोबाइल की लत बन रही मानसिक बीमारी, वर्चुअल ऑटिज्म की चपेट में किशोर

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वाराणसी। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच 10 से 15 वर्ष की आयु के किशोरों का जीवन मोबाइल स्क्रीन तक सिमटता जा रहा है। मनोरंजन और ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर शुरू हुआ अत्यधिक स्क्रीन टाइम अब बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। विशेषज्ञ इस स्थिति को वर्चुअल ऑटिज्म के रूप में देख रहे हैं। इसके कारण कई किशोर स्कूल जाने से बच रहे हैं, पढ़ाई में रुचि घट रही है और सामाजिक व्यवहार में बदलाव साफ नजर आने लगा है।

मंडलीय अस्पताल के मनोरोग विभाग की ओपीडी और प्रदेश सरकार के टेलीमानस विंग में रोजाना 20 से अधिक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इन किशोरों में चिड़चिड़ापन, रोने की प्रवृत्ति, आक्रामक व्यवहार और एकाग्रता की कमी देखी जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे स्कूल जाने से पहले बहाने बनाते हैं और जैसे ही स्कूल का समय निकलता है, मोबाइल का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। कई मामलों में भोजन को लेकर भी तरह-तरह के बहाने किए जा रहे हैं।

मनोरोग चिकित्सक डॉ. उपासना राय के अनुसार छोटी उम्र में दिमाग तेजी से सीखने की क्षमता रखता है, लेकिन यदि इस दौरान बच्चा लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहता है तो भाषा विकास, कौशल विकास और भावनात्मक समझ प्रभावित होती है। यही स्थिति वर्चुअल ऑटिज्म कहलाती है, जिसका असर किशोरों के आत्मविश्वास पर भी पड़ रहा है।

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12 वर्षीय बालक के एक अभिभावक ने बताया कि एक वर्ष पहले तक उनका बेटा काफी मिलनसार था, लेकिन मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उसका व्यवहार बदल गया है। वह धीरे-धीरे परिवार और समाज से कटने लगा है और रिश्तेदारों के यहां जाने से भी कतराने लगा है। वहीं, एक अन्य किशोर के अभिभावकों के अनुसार उनका बेटा हर समय ऑनलाइन गेम में डूबा रहता है, उसने पढ़ाई और स्कूल जाना लगभग छोड़ दिया है और हाईस्कूल की परीक्षा में भी कम अंक आए हैं। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, अधीरता और दूसरों की भावनाओं के प्रति उदासीनता ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है।

बाल रोग चिकित्सक डॉ. बृजेश कुमार का कहना है कि मोबाइल की लत से बच्चों को दूर रखकर ही इस समस्या से बचाव संभव है। माता-पिता को बच्चों को पर्याप्त समय देना चाहिए और मोबाइल के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना चाहिए। शुरुआत में यह समस्या भले ही छोटी लगे, लेकिन समय के साथ यह दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।

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