गोरखपुर
गोरखपुर फायरिंग केस की आरोपी अंशिका सिंह निकली ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की मास्टरमाइंड
रील बनाती रही, जाल बिछाती रही
गोरखपुर। कैंट थाने के सिंघड़िया इलाके में 20 जनवरी को हुई फायरिंग की आरोपी अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा को लेकर पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के अनुसार यह मामला केवल गोलीकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि अंशिका बीते कई वर्षों से ब्लैकमेलिंग, रंगदारी और धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का संचालन कर रही थी।
पुलिस जांच में सामने आया है कि अंशिका सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के जरिए प्रहरी और प्रभावशाली लोगों से संपर्क साधती थी। भरोसा जीतने के बाद वह वीडियो कॉल पर खुद को निर्वस्त्र कर दिखाती और सामने वाले का वीडियो या स्क्रीन रिकॉर्ड कर लेती थी। इसके बाद उसी रिकॉर्डिंग के आधार पर ब्लैकमेल कर मोटी रकम की मांग की जाती थी। आरोप है कि वह धमकी देती थी कि पैसे नहीं देने पर संबंधित व्यक्ति पर फर्जी दुष्कर्म या पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज करा दिए जाएंगे।

पुलिस की जांच के मुताबिक अंशिका ने पिछले करीब पांच वर्षों में लगभग 165 लोगों को ब्लैकमेल किया। इनमें पुलिसकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में करीब 15 पुलिसकर्मियों की रिकॉर्डिंग उसके फोन में मिलने की बात सामने आई है, जिनमें सीओ स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं।
मामले में डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की कड़ियां भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने आरोपी के मोबाइल से चैट, कॉल रिकॉर्ड, वीडियो और फोटो जैसे अहम डिजिटल सबूत बरामद किए हैं। साथ ही बैंक खातों की जांच भी जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसने, कब और किस तरीके से पैसे ट्रांसफर किए। जिन लोगों ने रकम भेजी, उनके बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

फायरिंग की घटना को लेकर पुलिस ने बताया कि 20 जनवरी को अंशिका अपने दोस्तों के साथ जन्मदिन मना रही थी। इसी दौरान निजी अस्पताल के मैनेजर विशाल मिश्रा से उसका विवाद हो गया। आरोप है कि अंशिका ने 50 हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन विशाल जब केवल 20 हजार रुपये लेकर पहुंचा तो कहासुनी बढ़ गई और छीना-झपटी की स्थिति बन गई। इसी दौरान गोली चल गई, जिसमें अमिताभ निषाद के पेट में गोली लग गई। घटना के बाद मौजूद भीड़ ने अंशिका और उसके साथियों को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अंशिका पहले भी कई मामलों में आरोपी रह चुकी है। उस पर संतकबीरनगर में युवक से रंगदारी मांगने, मकान मालिक पर झूठा केस दर्ज कराने, चोरी-चोरी छुपाने जैसे आरोपों में नाम सामने आ चुका है। इसके अलावा फर्जी नंबर प्लेट लगी थार गाड़ी से फरार होने का मामला भी उसके खिलाफ दर्ज बताया गया है।
सोशल मीडिया पर उसकी सक्रियता भी जांच के दायरे में है। पुलिस के अनुसार अंशिका के इंस्टाग्राम पर 700 से अधिक वीडियो रील्स थीं। उसने कई रील्स पुलिस थानों और गाड़ियों के सामने भी बनाई थीं, जिससे उसकी बेधड़क और बेखौफ छवि सामने आती है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क, संपर्कों और वित्तीय कड़ियों को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में ऐसे कई नाम हो सकते हैं जो अभी सामने आना बाकी हैं।
