गोरखपुर
खजनी की बेटी बनी गोरखपुर महोत्सव की शान, सुरों से रचा इतिहास
गोरखपुर। जनपद के खजनी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा खुटहना में जन्मी बिटिया सुप्रिया रावत ने अपने सुरों और साधना से गोरखपुर महोत्सव में ऐसा रंग बिखेरा कि पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। स्वर्गीय रामू रावत की पुत्री और माता कमलावती देवी की कोख से जन्मी सुप्रिया आज गोरखपुर की “सिंतारा” बनकर उभरी हैं। कठिन परिस्थितियों में पली-बढ़ी इस प्रतिभाशाली बेटी ने माता-पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बनाकर भजन व लोकगीत गायन में जिले का नाम रोशन किया है।

गोरखपुर महोत्सव के मंच पर जब सुप्रिया रावत ने पारम्परिक लोकगीत “नकटा नारी समझावे, चतुर होई जा बालम” प्रस्तुत किया, तो दर्शक खुद को झूमने से रोक नहीं सके। उनके स्वर, भाव और प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण अंचल की बेटियां भी राष्ट्रीय पटल पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं। सुप्रिया की गायकी में लोकसंस्कृति की मिठास और भक्ति की गहराई स्पष्ट रूप से झलकी।

इस अवसर पर महोत्सव में उपस्थित दिग्गज कलाकारों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने सुप्रिया रावत की खुलकर प्रशंसा की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। गोरखपुर की पावन सरजमीं, मां कोटही और कोर्णाक देवी के आशीर्वाद से फल-फूल रही यह बेटी आज पूरे जिले के लिए गर्व का विषय बन चुकी है।
सुप्रिया रावत की यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि खजनी और गोरखपुर की बेटियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली प्रेरणा है। आज पूरा गोरखपुर इस होनहार बिटिया को सलाम करता है और कामना करता है कि वह अपने भजनों और लोकगीतों से देश के उच्च पटल पर गोरखपुर का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित करे।
