गोरखपुर
ठंड में बढ़े नवजातों में निमोनिया के मामले, एसएनसीयू के सभी वेंटीलेटर बेड फुल
वेंटीलेटर न मिलने से निजी अस्पतालों का सहारा लेने को मजबूर परिजन
गोरखपुर। ठंड के मौसम में नवजात शिशुओं में निमोनिया और सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसका सीधा असर बीआरडी मेडिकल कॉलेज की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) पर पड़ा है। एसएनसीयू में वेंटीलेटरयुक्त सभी बेड फुल हो चुके हैं, जिससे गंभीर रूप से बीमार नवजातों को भर्ती कराने में परेशानी हो रही है।
नि:शुल्क उपचार के लिए बच्चों को लेकर पहुंच रहे तीमारदारों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज का खर्च प्रतिदिन चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच रहा है। चिकित्सकों ने नवजातों को ठंड से बचाकर रखने की सलाह दी है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में कुल 65 बेड हैं, जिनमें से 37 बेड पर वेंटीलेटर की सुविधा उपलब्ध है। ठंड बढ़ने के साथ ही निमोनिया और सांस फूलने की शिकायतों के मामले बढ़े हैं। इसके अलावा कम वजन, पीलिया और अन्य बीमारियों से ग्रसित नवजातों को भी उपचार के लिए स्वजन लेकर पहुंच रहे हैं।
ऐसे मामलों में वेंटीलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन सीमित संसाधनों के चलते सभी जरूरतमंद नवजातों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की एसएनसीयू प्रदेश की माडल यूनिट मानी जाती है। पहले नेहरू अस्पताल में 98 बेड की एसएनसीयू संचालित थी।
व्यवस्था में बदलाव के बाद नेहरू अस्पताल के एसएनसीयू के 98 में से 65 बेड को 500 बेड बाल रोग चिकित्सा संस्थान में स्थानांतरित कर दिया गया है। नेहरू अस्पताल में 33 बेड छोड़े गए हैं, जिनका उपयोग मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं के लिए किया जा रहा है।
बाहर से लाए जा रहे या रेफर होकर आने वाले नवजातों का इलाज 500 बेड बाल रोग चिकित्सा संस्थान में किया जा रहा है। इससे कुल एसएनसीयू बेड की संख्या में कमी आई है, जिसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए भारी पड़ रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएन शुक्ला ने बताया कि किसी भी मरीज को वापस नहीं किया जा रहा है। सभी का उपचार किया जा रहा है। वेंटीलेटर खाली न होने की स्थिति में अंबू बैग के माध्यम से सांस दी जाती है। जैसे ही वेंटीलेटर उपलब्ध होता है, गंभीर रूप से बीमार नवजातों को उस पर शिफ्ट किया जाता है।
