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गोरखपुर

सहजनवा में चार ईंट भट्ठों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, कच्ची ईंटें तोड़ी गईं, संचालन ठप

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विनिमय शुल्क बकाया पर प्रशासन का बड़ा एक्शन

गोरखपुर। जिलाधिकारी दीपक मीणा के सख्त निर्देशों पर जनपद में अवैध एवं नियमविरुद्ध संचालित ईंट भट्ठों के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार, 6 जनवरी 2026 को तहसील सहजनवा क्षेत्र में विनिमय (विनियमन) शुल्क जमा न करने वाले चार ईंट भट्ठों पर बड़ी कार्रवाई की गई। संयुक्त प्रशासनिक टीम की इस कार्रवाई से ईंट भट्ठा संचालकों में हड़कंप मच गया।

उप जिलाधिकारी सहजनवा, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार सहजनवा के नेतृत्व में खनिज विभाग गोरखपुर के खान अधिकारी, खान निरीक्षक तथा थाना अध्यक्ष सहजनवा की संयुक्त टीम ने क्षेत्र में छापेमारी की। जांच में सामने आया कि संबंधित ईंट भट्ठा संचालक पिछले कई वर्षों से बिना विनिमय शुल्क जमा किए अवैध रूप से भट्ठों का संचालन कर रहे थे, जिससे शासन के राजस्व को भारी क्षति हो रही थी।

कार्रवाई के दौरान सेमरादारी स्थित बीएस माक्रा ईंट उद्योग (प्रोपराइटर माधुरी) पर यह पाया गया कि बीते तीन से चार वर्षों से विनिमय शुल्क जमा नहीं किया गया था। प्रशासन ने मौके पर मौजूद कच्ची ईंटों को तुड़वा दिया और ईंट पथाई का कार्य तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया। संचालक को सख्त निर्देश दिए गए कि बकाया शुल्क ब्याज सहित शीघ्र जमा करें, अन्यथा विधिक कार्रवाई की जाएगी।

इसी तरह निबरहार स्थित पीसीएस ब्रिक फील्ड (प्रोपराइटर मनमोहन सिंह) पर भी तीन वर्षों से शुल्क बकाया पाया गया। कार्रवाई के दौरान ईंट लदी दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर थाना सहजनवा में खड़ी करा दी गईं और भट्ठा संचालन पूरी तरह रोक दिया गया।

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इसके अलावा कुंडा स्थित बीकेओ ब्रिक फील्ड (प्रोपराइटर जनार्दन यादव) तथा नियामदगंज स्थित आरबीएस ब्रिक फील्ड (प्रोपराइटर कुंवर सिंह) पर भी बिना विनिमय शुल्क के संचालन की पुष्टि हुई। दोनों स्थानों पर कच्ची ईंटें तोड़ दी गईं और ईंट पथाई का कार्य रुकवा दिया गया।

जिलाधिकारी दीपक मीणा ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि जनपद में कोई भी ईंट भट्ठा बिना विनिमय शुल्क जमा किए संचालित नहीं होगा। भविष्य में नियमों की अनदेखी करने वाले भट्ठा संचालकों के खिलाफ भट्ठा बंदी के साथ-साथ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि राजस्व की क्षति रोकी जा सके और नियमों के अनुरूप ईंट भट्ठों का संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

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