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गोरखपुर

राज्य सूचना आयुक्त के आदेश की अनदेखी, जनसूचना अधिकारी पर कार्रवाई संभव

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गोरखपुर। राज्य सूचना आयुक्त लखनऊ द्वारा जनसूचना अधिकारी विकासखंड कौड़ीराम एवं मुख्य विकास अधिकारी गोरखपुर को कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बावजूद भी उक्त अधिकारियों द्वारा राज्य सूचना आयुक्त के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। जिस पर आयोग द्वारा विपक्षी जनसूचना अधिकारी पर दंडाधिरोपित की कार्रवाई किए जाने हेतु अपीलार्थी को आश्वासन दिया गया।

उल्लेखनीय है कि कौड़ीराम विकासखंड के सुमही गांव निवासी दुर्गेश मिश्र ने ग्राम पंचायत द्वारा बिना प्रस्ताव अथवा नोटिस के जबरन गुंडे के बल पर उनके अनुपस्थिति में उनके घर के रास्ते मकान की दीवाल को तोड़कर पाइप डलवा कर सार्वजनिक नाली का निर्माण करवा दिया गया था।

इसके संदर्भ में दुर्गेश मिश्र द्वारा जन सूचना अधिकारी विकासखंड कौड़ीराम से जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा  06के अंतर्गत सूचना मांगी गई थी जिस पर जन सूचना अधिकारी द्वारा प्रार्थी द्वारा मांगी गई सूचना को न देकर, भ्रामक ,असत्य एवं गलत सूचना ,निर्धारित समय अवधि के बाद  दी गई। उसके बाद प्रार्थी ने मुख्य विकास अधिकारी गोरखपुर को निर्धारित प्रारूप एवं प्रपत्र के माध्यम से सूचना मांगी लेकिन उसके बाद भी वही भ्रामक, असत्य एवं झूठी सूचना जन सूचना अधिकारी कौड़ीराम द्वारा दी गई। इसके बाद परेशान होकर प्रार्थी ने राज्य सूचना आयुक्त लखनऊ के वहां अपील की।

जिस पर संज्ञान लेते हुए राज्य सूचना आयुक्त डॉ. दिलीप कुमार अग्निहोत्री द्वारा अपील संख्या 4 /A/0185/2025 मे विगत 21 फरवरी 2025 एवं 16 जुलाई 2025 के द्वारा विपक्षी जन सूचना अधिकारी/ मुख्य विकास अधिकारी गोरखपुर को अपीलार्थी के मूल आवेदन पत्र दिनांक 5 अक्टूबर 2024 के क्रम में सूचनायें उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया था लेकिन विपक्षी जन सूचना अधिकारी द्वारा अपीलार्थी को ना तो सूचना उपलब्ध कराया गया और ना तो आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। आयोग द्वारा 30 दिसंबर 2025 को सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में विपक्षी जन सूचना अधिकारी/ मुख्य विकास अधिकारी गोरखपुर के विरुद्ध दंड अधिरोपित किया जाए।

आश्चर्य की बात है की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले में अधिकारीगण इतने निरंकुश हो गए हैं कि राज्य सूचना आयुक्त लखनऊ द्वारा कई बार कारण बताओ नोटिस देने के बावजूद भी उनके निर्देशों को दरकिनार किया गया जो अत्यंत ही दुखद है। ऐसे लापरवाह एवं निरंकुश अधिकारियों से आम जनता को न्याय मिल पाना अत्यंत ही असंभव प्रतीत होता है।

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