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गोरखपुर

उषा–अनिरुद्ध प्रेम लीला और भक्तिभाव से सराबोर हुई महिलवार की धरती

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गोरखपुर के खजनी थाना क्षेत्र के ग्राम महिलवार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन अपने अंतिम दिन आध्यात्मिकता और भाव-विभोर कर देने वाले पलों के साथ संपन्न हो गया। श्री कमला गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती निर्मला देवी के सौजन्य से आयोजित इस वृहद कथा में भक्तों का उत्साह अंतिम क्षण तक बना रहा। कथा व्यास आचार्य पंडित अरविंद प्रताप मिश्र जी के मधुर, संगीत-रस से भरे प्रवचनों ने वातावरण को दिव्यता और भक्ति से इस प्रकार भर दिया कि प्रत्येक श्रोता आत्मिक शांति के सागर में डूब गया।

अंतिम दिन की कथा का मुख्य केंद्र भगवान श्रीकृष्ण के सोलह हज़ार आठ रानियों, उनके दस-दस पुत्रों, तथा वाणासुर की पुत्री उषा और भगवान के पौत्र प्रद्युम्न के पुत्र अनिरुद्ध की प्रेम कथा रही। आचार्य पंडित अरविंद प्रताप मिश्र जी ने बड़े ही सुन्दर ढंग से समझाया कि किस प्रकार उषा को स्वप्न में एक दिव्य पुरुष का दर्शन हुआ और चित्रलेखा की योग सिद्धियों द्वारा उषा के हृदय में बसे उस दिव्य पुरुष—अनिरुद्ध—का चित्र खींचा गया।

संगीतमय वर्णन के दौरान कथा में प्रस्तुत उषा–अनिरुद्ध प्रसंग ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले, मृदंग और हारमोनियम की स्वरलहरियों के बीच जब आचार्य जी ने उषा के अनिरुद्ध के प्रति समर्पण और उनके मिलन की कथा प्रस्तुत की, तो उपस्थित भक्तजन भावविभोर होकर भक्ति रस में डूब गए। पूरा कथा स्थल मानो द्वापर युग के उस अद्भुत प्रसंग का साक्षी बन गया हो, जब प्रेम, साहस और धर्म के बीच अद्भुत संतुलन दिखाई देता है।

कथा में बताया गया कि उषा और अनिरुद्ध का मिलन केवल प्रेम कथा नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि जब प्रेम सत्य और पवित्र हो, तो देवता भी उसका मार्ग प्रशस्त करते हैं। अनिरुद्ध और उषा के मिलन पर वाणासुर का क्रोध, युद्ध की स्थिति, और अंततः भगवान श्रीकृष्ण के हस्तक्षेप से उत्पन्न धर्म विजय का संदेश कथा का प्रमुख आकर्षण बना। आचार्य जी ने इसे मानव जीवन के लिए एक प्रेरणा बताया—कि हर चुनौती के बाद उजाला अवश्य आता है, और प्रेम व सत्य हमेशा विजयी ही होते हैं।

कथा के दौरान उपस्थित भक्तों में ऊर्जा, श्रद्धा और संगीत की मधुरता का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने पूरे गांव के वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महिलवार गांव में यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक उत्सव बन गया जिसने समाज को ज्ञान, प्रेरणा और संस्कारों की अमूल्य धरोहर प्रदान की।

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समापन में ग्रामवासियों ने आयोजकों श्री कमला गुप्ता एवं श्रीमती निर्मला देवी का हृदय से आभार व्यक्त किया। भक्तों ने कहा कि यह कथा गांव के लिए वरदान बनकर आई, जिसने सभी को एकता, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। अंतिम आरती के दौरान हर आंख में श्रद्धा की चमक और मन में शांति का भाव स्पष्ट झलक रहा था। महिलवार की यह संगीत-मय श्रीमद्भागवत कथा आने वाले वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में भक्ति का दिव्य अध्याय बनी रहेगी।

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