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गोरखपुर

आईएएस संतोष वर्मा के बयान पर ब्राह्मण समाज में उबाल, कुलदीप पाण्डेय ने जताया रोष

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गोरखपुर। मध्यप्रदेश में अजाक्स के नवनियुक्त अध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम में आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए ब्राह्मण समाज की बेटियों के प्रति कथित रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। उनके इस बयान से देशभर के ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।

इसी क्रम में गोरखपुर के युवा समाजसेवी एवं ब्राह्मणवादी नेता कुलदीप पाण्डेय ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रशासन को सोशल मीडिया एवं पत्र के माध्यम से मांग भेजी है कि संतोष वर्मा पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।

कुलदीप पाण्डेय ने ब्राह्मण बेटियों के सम्मान को सर्वोपरि बताते हुए संतोष वर्मा की कथित अभद्र टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने ब्राह्मण तथा सनातन समाज के लोगों से अधिक से अधिक थानों में एफआईआर दर्ज करवाने की अपील भी की। पाण्डेय ने कहा कि मामला केवल जाति का नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी की समझ और मानसिक संतुलन का है, जिसे यह ज्ञान नहीं कि कहाँ, क्या और किसके बारे में क्या कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी समाजों की बेटियाँ सम्माननीय हैं और किसी को भी उन पर अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की नीतियों का हवाला देने वाले ऐसे अधिकारी स्वयं उनके नाम को कलंकित कर रहे हैं और समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं। पाण्डेय के अनुसार, संतोष वर्मा के बयान ने पूरे देश में असंतोष फैलाया है, फिर भी ग्वालियर सहित मध्यप्रदेश के किसी भी स्थान पर एक भी एफआईआर दर्ज न होना सरकार व प्रशासन के लिए शर्म की बात है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार चुप रहती है तो ब्राह्मण समाज आगामी चुनावों में सरकार को कड़ी चुनौती देगा।

समाजसेवी कुलदीप पाण्डेय ने यह भी कहा कि बेटी चाहे ब्राह्मण, वाल्मीकि या राजपूत समाज की हो। यदि कोई इस तरह की अपमानजनक भाषा का प्रयोग करेगा तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने ऐसे लोगों को जेल भेजने की मांग की।

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कुलदीप पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे को सिद्ध करने का यही समय है। यदि मध्यप्रदेश सरकार उचित निर्णय नहीं लेती है, तो यह माना जाएगा कि वह ब्राह्मण विरोधी है, जिसके चलते ब्राह्मण समाज जनांदोलन के लिए बाध्य होगा और उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार एवं प्रशासन पर होगी।

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