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वाराणसी

नरक झेल रहे राजापुरा के लोग, व्यापार और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

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वाराणसी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को देश के टॉप मॉडल शहरों की लिस्ट में शामिल करने की कवायद जारी है। इंदौर की तर्ज पर स्वच्छता अभियान की तैयारी जोर-शोर से हो रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर का राजापुरा इलाका पिछले 10 वर्षों से सीवर के पानी में डूबा हुआ है। यहां सुबह 7 बजे से एक फीट तक सीवर का पानी भर जाता है और दोपहर तक लोगों को नरक जैसी स्थिति झेलनी पड़ती है।

राजापुरा सिर्फ 5 किमी दूर, फिर भी अनदेखी
नगर निगम मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित राजापुरा मोहल्ले में करीब 7 हजार से ज्यादा की आबादी रहती है। मिली जानकारी के मुताबिक, सुबह 7 बजे से यहां सीवर का पानी भरना शुरू होता है और एक घंटे में सड़क पर एक फीट तक पानी फैल जाता है। यह हालत दोपहर 12 बजे तक बनी रहती है। खास बात यह है कि सीवर जाम भी नहीं है, लेकिन पानी अचानक भरता और अचानक निकलता है। बरसात के समय तो हालात और बिगड़ जाते हैं।

स्थानीय लोगों का छलका दर्द
स्थानीय दुकानदार मोहम्मद इकराम बताते हैं कि पानी भरने से उनका पूरा कारोबार चौपट हो गया है। 3 बजे के बाद ही दुकान खोल पाते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, रवि पसवाल का कहना है कि यह समस्या 10 साल से बनी हुई है। अधिकारी आते हैं, निरीक्षण करते हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ।

वहीं, स्थानीय लोग बताते हैं कि महिलाओं और बच्चों को सीवर के पानी से भारी परेशानी होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश में हालात और भी खराब हो जाते हैं, क्योंकि सड़कें 4 फीट तक पानी में डूब जाती हैं। सीवर के पानी की वजह से गाड़ियों का आना-जाना ठप हो जाता है। पुलिस की गाड़ियां तक यहां से बिना रुके निकल जाती हैं। दुकानदारों का कारोबार आधा रह गया है और ग्राहक इस इलाके में रुकने से बचते हैं।

लोगों का कहना है कि नगर निगम, जल निगम और जलकल विभाग में सैकड़ों शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। पूरे देश में स्वच्छता का अभियान चल रहा है, मगर राजापुरा आज भी गंदगी और जलभराव के दलदल में फंसा हुआ है।

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