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वाराणसी

कबीर प्रकट महोत्सव में गूंजे भजन-सत्संग, देशभर से जुटे संत और श्रद्धालु

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वाराणसी। सदगुरु कबीर साहब के प्रकट महोत्सव के अवसर पर 9 से 11 जून तक आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का दूसरा दिन भजन, सत्संग और भंडारे की दिव्य छाया में सम्पन्न हुआ। इस आध्यात्मिक आयोजन में देशभर से पधारे संत-महात्माओं और वक्ताओं ने कबीर दर्शन की गहराई और उसकी आज की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता महामंडलेश्वर विवेक नाथ महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि कबीर के बिना सच्चे ज्ञान की प्राप्ति असंभव है। पटना, बिहार से पधारे प्रख्यात विद्वान प्रो. शत्रुघ्न शशांक ने कहा कि कबीर साहब समस्त जीवों के उद्धार के लिए इस धराधाम पर अवतरित हुए थे। इग्नू के डॉ. मनोज कुमार ने कबीर वाणी की कालजयी महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि वह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी 600 वर्ष पूर्व थी।

मध्यप्रदेश के रतलाम से आयी पूर्व प्रधानाचार्या पृथ्वीराज परमार ने समाज सुधार में कबीर साहब के विचारों की अनिवार्यता पर बल दिया। अध्यक्षीय भाषण में महंत गोविंद दास शास्त्री ने कहा कि आज समाज को सही दिशा देने के लिए कबीर जैसे समाज सुधारकों की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में जगदीश त्रिपाठी, अशोक वकील, मोहम्मद सान सहित कई श्रद्धालु सम्मिलित हुए। मंच संचालन मास्टर कृष्ण दास द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया। कई संत मंडलियों ने कबीर भजन और प्रवचन प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। धन्यवाद ज्ञापन दिनेश दास जी महाराज ने किया।

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