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सियासत

सामाजिक सरोकार में आज की बात

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उदाहरण के तौर पर अगर देखा जाय तो कहते हैं कि एक माँ के अगर चार बच्चे हैं तो कौन सबसे ज्यादा प्यारा और कौन कम प्यारा हैं अगर इसका उत्तर कोई लेना चाहेगा तो उसको उत्तर यहीं मिलेगा की एक माँ के लिए उसके चारों बच्चें बराबर है और उस माँ के हृदय में कोई भेद नहीं होगा।

बताते चलें कि बात ही कुछ ऐसी है कि इस 38 सुल्तानपुर लोक सभा मे मेनका गांधी चुनाव लड़ रही है और वो सुल्तानपुर वासियों के लिए एक माँ की तरह ही उनके साथ व्यवहार भी निभाती है और जिले के प्रत्येक नागरिक के लिए वे एक माँ के तौर पर सदैव तत्पर रहती हैं।

अब सुल्तानपुर में जिस तरह से घटना क्रम चल रहा है उसको देखते हुए कहना ग़लत ना होगा कि एक माँ के हृदय पर क्या गुजरती होगी जब उन्हें ये पता चले कि उनके बच्चों के ऊपर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा है ये अलग बात है कि बच्चें अलग अलग रह रहे हैं और उनपर दुःखो का पहाड़ टूट कर गिर पड़ा है।

इसी कड़ी में हम बात करते हैं अभी हाल ही में हुए उस हादसे की जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और उसका भी परिवार उजड़ गया बच्चों के सर से पिता का साया उठ गया और पत्नी की माँग का सिंदूर मिट गया,और ये सब तब हो गया जब सांसद प्रत्याशी मेनका गांधी अपने दस दिवसीय दौरे पर अपने लोक सभा क्षेत्र सुल्तानपुर में प्रचार प्रसार कर रही थी कहते हैं होनी को कोई टाल नहीं सकता वो तो अटल हैं।

चूंकि यह हादसा उन्हीं के पार्टी पूर्व जिला अध्यक्ष व मौजूदा भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष चन्दन नारायण सिंह के परिवार में घटित हुई हैं इसलिए ये बात और भी बड़ी हो गई थी कि जहाँ संगठन के लोग जी जान से मेनका गांधी के चुनाव का प्रचार प्रसार कर रहे हैं तो वहीं ये हृदय विदारक घटना उस परिवार में घटित हो गई जो मेनका गांधी के चुनाव का प्रचार प्रसार कर रहे हैं।

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इस तरह के माहौल में भला चुनाव का प्रचार प्रसार कैसे हो सकता था इसलिए दुःख की इस घड़ी में मेनका गांधी ने चुनाव के प्रचार प्रसार में गति को धीमी करते हुए उस परिवार में जा पहुंची जिस परिवार में ये हृदय विदारक घटना घटित हुई थी,वहाँ पहुँच कर दुःख की इस घड़ी में शोकागुल परिवार में उनको सांत्वना देने पहुँची और उनका दर्द बंटा साथ ही ईश्वर से प्रार्थना की की दुःख की इस घड़ी में ईश्वर परिवार को दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे और उनसे जो बन पड़ेगा वो परिवार के दुःख की इस घड़ी में जो हो सकेगा हर संभव मदद करेंगी,ऐसे नहीं कोई मेनका गांधी को माताजी कहता है दरअसल वो एक माँ का दायित्व भी निभाती हैं और अपनों को कभी दुःखी नहीं देख सकती और उनके सुख दुःख में हमेशा उनके साथ खड़ी रहती हैं।

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