वाराणसी
सदगुरु कबीर की प्राकट्य स्थली में 506 परिनिर्वाण दिवस मनाया गया
वाराणसी। सदगुरु कबीर साहब के 506 वें परिनिर्वाण दिवस के शुभ अवसर पर प्राचीन सदगुरु कबीर प्रकट स्थली लहरतारा में बीजक पाठ सत्संग एवं भंडारा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर कबीर की मूल ग्रंथ बीजक का पाठ हुआ। इसके बाद सत्संग एवं भंडारा का आयोजन हुआ। सत्संग में राधा साहब ने भजन के माध्यम से भक्तगणों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वक्ता के रूप में दिनेश दास महाराज दिल्ली से पधारे। महंत त्रिलोक एवं डॉ मनोज सिंह ने अपना विचार प्रकट किया।

प्राकट्य स्थली के पीठाधीश्वर महंत गोविंद दास शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि, कबीर साहेब के बताए हुए रास्तों पर चलकर एवं कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। यदि हम काम नहीं करेंगे तो उसकी फल की प्राप्ति नहीं होगा। अच्छे कर्म के माध्यम से ही अपने जीवन को इस जरामरण के भवसागर से मुक्ति मिल सकता है और परमपिता परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। यदि हम काम नहीं करेंगे तो हमारा मुक्ति संभव नहीं है, यदि कर्म करेंगे तो कहीं पर भी मरे हमारा मुक्ति निश्चय है। यही कारण है की सदगुरु कबीर ने कर्म की प्रधानता को बताने के लिए काशी से 225 किलोमीटर दूर मगहर पर अपना शरीर छोडा। जहां पर आज भी सतगुरु कबीर की मजार एवं मंदिर दोनो विद्यमान है।
