गोरखपुर
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर किसानों की ज़मीन पर चोट, हरपुर बुदहट में उबाल
“विकास चाहिए, पर गला दबाकर नहीं”
गोरखपुर के दक्षिणांचल अंतर्गत हरपुर बुदहट थाना क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी द्वारा किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण ने किसानों और ग्रामीणों के दिलों में गहरी पीड़ा भर दी है। जिस सड़क की चौड़ाई पहले 3.12 मीटर थी, उसे 7 मीटर तक बढ़ाया गया। वर्ष 2024 के बाद अब एक बार फिर चौड़ीकरण की कार्रवाई शुरू होते ही ग्रामीणों में रोष फूट पड़ा है। जनता का सीधा आरोप है कि पिछली बार का मुआवजा आज तक नहीं मिला और दो साल बाद फिर वही ज़मीन छीनी जा रही है, जिससे दर्जनों किसान भूमि हीन होने की कगार पर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं। सड़क बने, आवागमन सुगम हो—इससे किसी को आपत्ति नहीं। लेकिन बिना मुआवजा दिए, बिना भरोसा दिलाए, बिना संवाद के विकास का अर्थ अगर किसी की आजीविका छीन लेना है, तो यह अन्याय है। किसानों ने दो टूक कहा कि “हमारी सहमति के बिना, हमारे हक़ को कुचला गया तो आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।”

इसी बीच, जनसभा में रामपरीख का विशेष व्याख्यान लोगों के दिलों को छू गया। उन्होंने कहा, “विकास वह नहीं जो खेत की मेड़ काट दे और किसान की रोटी छीन ले। विकास वह है जो सड़क के साथ भरोसा बनाए, मुआवजे के साथ मुस्कान लौटाए। सरकार की योजनाएँ तभी सफल हैं जब आख़िरी पंक्ति का किसान सुरक्षित हो।” उनके शब्दों ने भीड़ की पीड़ा को आवाज़ दी और मंच पर मौजूद हर व्यक्ति ने न्याय की माँग को एक स्वर में दोहराया।
इस विरोध में सहजनवा से निवर्तमान भाजपा मंडल अध्यक्ष नरेन्द्र शुक्ला सहित रामनवल जी, पूर्व प्रधानाध्यापक प्रमोद शर्मा, जयदेश समाचार पत्र के संवाददाता रामधारी प्रसाद, सेवा निवृत्त इंस्पेक्टर पुलिस विभाग गिरिश चन्द्र चौहान, सत्यम शुक्ला, रघुनाथ मिश्रा, अरविंद शुक्ला, रजनीश शुक्ला, राणा प्रताप राम जोखन गुप्ता, योगेन्द्र प्रसाद, रामाश्रय जी (अध्यापक), अजय गुप्ता, सरस्वती देवी, तारा देवी सहित दर्जनों महिला-पुरुषों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

महिलाओं की आंखों में आंसू थे, पुरुषों की आवाज़ में आक्रोश। सवाल साफ़ है—जब पहले की जमीन के बदले मुआवजा नहीं मिला, तो अब नए चौड़ीकरण का आधार क्या है? जनता ने यह भी पूछा कि आखिर किस नियम के तहत बार-बार चौड़ीकरण हो रहा है और किसान को सूचना तक क्यों नहीं?
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से अपील की है कि विकास हो, लेकिन इंसाफ के साथ। मुआवजा समय पर और पारदर्शी तरीके से दिया जाए, सीमांकन स्पष्ट हो और संवाद स्थापित किया जाए। लोगों का कहना है कि सरकारें बदलती हैं, योजनाएँ आती-जाती हैं, लेकिन किसान की ज़मीन और आत्मसम्मान एक बार टूटा तो उसे जोड़ना आसान नहीं।
हरपुर बुदहट की यह आवाज़ सिर्फ एक सड़क की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जिसे बचाए बिना कोई भी विकास स्थायी नहीं हो सकता। जनता का संदेश स्पष्ट है—“विकास करें, पर भोली-भाली जनता का गला दबाकर नहीं।”
