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वाराणसी

विवाह की तारीख तय करने में करनी होगी खास प्लानिंग, मलमास और चातुर्मास डालेंगे ब्रेक

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वाराणसी। वर्ष 2026 में विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त लगातार नहीं, बल्कि रुक-रुक कर उपलब्ध होंगे। इस वर्ष खरमास और शुक्रास्त के साथ-साथ मलमास का भी प्रभाव रहेगा, जिसके कारण वैवाहिक लग्न कई चरणों में मिलेंगे। जनवरी का महीना पूरी तरह से बिना किसी विवाह मुहूर्त के गुजर गया।

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार एक फरवरी को शुक्रोदय होगा। इसके बाद दो और तीन फरवरी को बाल्यावस्था के कारण विवाह मुहूर्त नहीं बन पाएंगे, जबकि चार फरवरी से शुभ लग्नों की शुरुआत होगी। यह क्रम 15 मार्च तक चलेगा। इस अवधि में कुल 20 दिन विवाह के लिए शुभ माने गए हैं। 15 मार्च से खरमास आरंभ होने के कारण एक बार फिर विवाह आयोजनों पर विराम लग जाएगा।

खरमास की समाप्ति के बाद 15 अप्रैल से पुनः वैवाहिक लग्न शुरू होंगे, जो 17 मई तक उपलब्ध रहेंगे। इसके पश्चात 17 मई से 15 जून तक मलमास के चलते सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। मध्य जून से विवाह के लग्न फिर से आरंभ होंगे और जुलाई के पहले सप्ताह तक जारी रहेंगे। इसके बाद चातुर्मास के कारण एक बार फिर विवाह आयोजनों पर रोक लग जाएगी। चातुर्मास समाप्त होने के बाद नवंबर से विवाह के गीत पुनः गूंजने लगेंगे।

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ज्योतिषियों का कहना है कि इस वर्ष मुहूर्तों की स्थिति को देखते हुए परिवारों को विवाह कार्यक्रम तय करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी। जनवरी में कोई भी शुभ मुहूर्त न होने के कारण लोगों को फरवरी के पहले सप्ताह तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। चार फरवरी से 15 मार्च तक उपलब्ध 20 दिन विवाह के लिए विशेष महत्व रखते हैं।

खरमास और मलमास जैसी धार्मिक अवधियों के कारण इस वर्ष विवाह आयोजनों में कई बार रुकावट आएगी। ऐसे में परिवारों को समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनानी होंगी, ताकि मांगलिक कार्य निर्धारित शुभ समय में संपन्न किए जा सकें। सही योजना और समय प्रबंधन के साथ इस वर्ष भी विवाह आयोजन सफलतापूर्वक किए जा सकेंगे।

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