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रोजगार सेवक पर मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने का आरोप
संतकबीर नगर। जनपद में मनरेगा घोटाला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन मनरेगा भ्रष्टाचार की खबरें समाचार पत्रों की सुर्खियां बन रही हैं। लेकिन मनरेगा के जनपदीय जिम्मेदार डीसी मनरेगा कुम्भकर्णी नींद में मस्त हैं। डीसी मनरेगा को केवल अपने हिस्से की मलाई से मतलब है। अपना काम बनता है, तो भाड़ में जाए जनता। यह है मनरेगा के जिम्मेदारों की असली हकीकत। भ्रष्टाचार में कार्यवाही न करने की डीसी मनरेगा ने कसम खा लिया हो, ऐसा प्रतीत होता है।
मनरेगा योजना गरीबों के रोजगार के लिए बनाई गई है, लेकिन जनपद में यह योजना जिम्मेदारों के ऐशो-आराम की योजना बनकर रह गई है। पूरे जनपद में मनरेगा योजना में लूट मची है। प्राप्त समाचार के अनुसार, साथा विकासखंड के अंतर्गत स्थित ग्राम पंचायत अंतरी ननकार में 85 मनरेगा मजदूरों की हेरा-फेरी चल रही है। पंचायत अंतरी ननकार में प्रतिदिन 85 मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि धरातल पर एक भी मनरेगा मजदूर कार्य नहीं कर रहे हैं।
लेकिन उपरोक्त मनरेगा मिट्टी निर्माण कार्य में मजदूरों की उपस्थिति केवल कागजों में दर्ज हो रही है, जबकि धरातल पर मजदूर शून्य के बराबर हैं। मीडियाकर्मियों को जब ग्राम पंचायत अंतरी ननकार में मनरेगा भ्रष्टाचार की जानकारी मिली, तो वे अंतरी ननकार पहुंचे। डिस्प्ले बोर्ड न लगे होने के कारणों से ग्रामीणों से पूछताछ करते हुए कार्य की साइड पर पहुंचे, जहां कार्य स्थल पर एक भी मजदूर काम करते नहीं मिले। जबकि उसी साइड पर 85 मनरेगा मजदूरों की उपस्थिति प्रतिदिन लगाई जा रही है।
प्रधान, रोजगार सेवक व सचिव ने मनरेगा का धन का बंदरबांट करने की तैयारी में हैं, जबकि अभी तक संदर्भित साइड पर शून्य बराबर कार्य हुआ है। जबकि इससे स्पष्ट होता है कि जिम्मेदारों की प्राथमिकता भ्रष्टाचार है, न कि गरीबों के हित में। मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की और जिम्मेदारों को जवाबदेही, साथ ही गरीबों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। अब देखना यह है कि जनपद में अपने आमद के समय से ही हनक बनाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है या होता रहेगा भ्रष्टाचार।
