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वाराणसी

रोजगार और राहत से दूर रहा बजट, युवाओं और मध्यम वर्ग को नहीं मिली कोई सौगात : राघवेन्द्र चौबे

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वाराणसी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए बजट (Budget 2026) को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राघवेन्द्र चौबे ने कहा है कि यह बजट जनता की उम्मीदों से पूरी तरह खाली दस्तावेज़ है। उनका कहना है कि आम नागरिक को इस बजट से किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली है। युवाओं के लिए रोजगार सृजन को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई, न ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने की दिशा में कोई प्रभावी कदम सामने आया है। इसके साथ ही करदाताओं को भी टैक्स में किसी तरह की रियायत नहीं दी गई।

राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बावजूद उसे नियंत्रित करने के लिए बजट में कोई कारगर उपाय नहीं किए गए हैं। सोने और चांदी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं, जिससे आम परिवारों के लिए शादियां करना, आभूषण खरीदना या बनवाना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने इसे देश की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि सरकार ने इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में बजट को निराशाजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि वाराणसी, जो प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है, वहां पिछले 12 वर्षों में औद्योगिक विकास के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई है। इसके विपरीत, रिहायशी इलाकों में मूलभूत सुविधाएं तक बदहाल होती चली गई हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बजट पेश होने के दौरान शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। सरकार द्वारा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाने और कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर 22 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाने की घोषणा से बाजार में हाहाकार मच गया। बाजार विशेषज्ञों को जहां एसटीटी में कटौती की उम्मीद थी, वहीं सरकार ने इसके उलट फैसला लिया।

राघवेन्द्र चौबे ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि कुल मिलाकर भाजपा सरकार ने देश का एक और वर्ष असफल आर्थिक नीतियों के नाम कर दिया है।

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