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वाराणसी

रिहा होने के बाद पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह की परिवार के साथ पहली तस्वीर आई सामने, पत्नी व बेटे के संग किया बाबा विश्वनाथ का दर्शन

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वाराणसी सेंट्रल जेल से बाहर आने के बाद आज पहली बार पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह परिवार के साथ बाबा विश्वनाथ के दरबार में दिखे। 13 साल तक जेल में रहने के बाद उन्हें गत 4 अगस्त को वाराणसी सेंट्रल जेल से रिहा किया गया था। उसके बाद बृजेश सिंह पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं।

जेल से रिहाई के बाद अभी तक उनकी परिवार के संग कोई तस्वीर सामने नहीं आई थी मगर सावन महीने की पूर्णिमा के दिन उन्होंने अपनी पत्नी एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह और बेटे सागर के साथ बाबा विश्वनाथ के मंदिर में विधिवत दर्शन पूजन किया। इस मौके पर बृजेश सिंह के काफी संख्या में समर्थक भी मौजूद थे।

रिहाई के बाद पहली बार आए सामने
मऊ के पूर्व बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला करने के मामले में बृजेश सिंह को गत 3 अगस्त को जमानत मिली थी और वाराणसी सेंट्रल जेल से 4 अगस्त को उनकी रिहाई हुई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्रा ने कुछ शर्तों के साथ बृजेश सिंह की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था। जेल से रिहाई के बाद भी बृजेश सिंह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में अभी तक नहीं दिखे थे। आज वे अपनी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह और बेटे सागर के साथ बाबा के दरबार में पहुंचे।

दर्शन के समय समर्थकों का हुजूम
खास बात यह है कि अभी तक बृजेश सिंह की सार्वजनिक कार्यक्रम की कोई भी तस्वीर सामने नहीं आई थी। उनकी तस्वीर सिर्फ पुलिस फाइलों और उनकी गिरफ्तारी के समय की ही है। अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्क रहने वाले बृजेश सिंह इस तरह कभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे।

हालांकि आज जब वे पत्नी और बेटे के साथ बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने पहुंचे तो उनके साथ भारी लाव लश्कर और समर्थकों का हुजूम था। विश्वनाथ मंदिर के प्रांगण में उन्होंने परिवार और समर्थकों संग तस्वीर भी खिंचाई।

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चर्चित घटना में हाल में मिली थी जमानत
जिस घटना में जमानत मिलने के बाद बृजेश सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हुआ वह घटना जुलाई 2001 में हुई थी। गाजीपुर के मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के यूसुफपुर कासिमाबाद मार्ग पर उसरी चट्टी के पास मऊ के तत्कालीन विधायक मुख्तार सिंह के काफिले पर हमला हुआ था। इस हमले में मुख्तार अंसारी का गनर और एक सहयोगी मारा गया था जबकि 9 लोग घायल हो गए थे। बाद में एक और घायल ने दम तोड़ दिया था।

इस मामले में मुख्तार अंसारी की ओर से बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस घटना में बीजेपी के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय का नाम भी सामने आया था। यह मामला पूर्वांचल में काफी चर्चित हुआ था और इस मामले में जमानत मिलने के बाद ही बृजेश सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हुआ।

2009 में हुई थी बृजेश की गिरफ्तारी
इस घटना के बाद बृजेश सिंह गायब हो गए थे और कई साल तक उनकी कोई खबर नहीं मिली। आठ साल बाद वर्ष 2009 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बृजेश सिंह को भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया था और वे तभी से जेल में बंद थे। बृजेश सिंह के ऊपर 41 मामले दर्ज थे जिनमें से 15 में वे बरी हो चुके हैं अभी सिर्फ 3 मुकदमों का ही ट्रायल चल रहा है और इनमें भी दो मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी। बस यही एक मामला बचा था जिसमें हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई हुई।

एमएलसी रह चुके हैं बृजेश सिंह
गत अप्रैल में हुए एमएलसी चुनाव में वाराणसी – चंदौली – भदोही सीट पर बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सुदामा पटेल को करारी शिकस्त दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में भाजपा की यह हार चर्चा का विषय बनी थी। भाजपा प्रत्याशी सुदामा पटेल ने हार के बाद पार्टी के लोगों पर अन्नपूर्णा सिंह की मदद करने का बड़ा आरोप लगाया था।

अन्नपूर्णा सिंह ने 2010 में इसी सीट पर बसपा प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी जबकि 2016 में इसी सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बृजेश सिंह ने जीत हासिल की थी। बृजेश सिंह के बड़े भाई उदयनाथ सिंह उर्फ चुलबुल सिंह भी इस सीट से एमएलसी रह चुके हैं। मौजूदा समय में बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह चंदौली जिले की सैयदराजा विधानसभा सीट से विधायक हैं।

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