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वाराणसी

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कराने वाले पुजारी का निधन, पीएम मोदी ने व्यक्त की संवेदना

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वाराणसी। अयोध्या में श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करवाने वाले प्रमुख पुजारी लक्ष्मीकांत दीक्षित का शनिवार को भोर में मंगला गौरी, वाराणसी पर उनके आवास पर स्वर्गवास हो गया। उनकी उम्र लगभग 86 साल थी और काफी समय से अस्वस्थ थे। उनका मर्णिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार किया गया।

पुजारी लक्ष्मीकांत दीक्षित आचार्य की गिनती काशी के वरिष्ठ विद्वानों में होती थी। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान लक्ष्मीकांत दीक्षित का प्रमुख पुजारी के रूप में चयन हुआ था। लक्ष्मीकांत दीक्षित की अध्यक्षता में 121 पंडितों की टीम ने अयोध्या अनुष्ठान किया था। इसमें काशी के 40 से अधिक विद्वान थे, जो 16 जनवरी से प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में शामिल रहे। प्राण प्रतिष्ठा के बाद मुख्य पुजारी और आचार्य पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित ने पीएम नरेंद्र मोदी को रक्षासूत्र बांधा था। पीएम ने लक्ष्मीकांत दीक्षित का पैर छूकर आशीर्वाद लिया था।

लक्ष्मीकांत दीक्षित मूल रूप से महाराष्ट्र के शोलापुर जिले के रहने वाले थे। लेकिन कई पीढ़ियों से उनका परिवार काशी में रह रहा है।‌ उनके पूर्वजों ने नागपुर और नासिक रियासतों में भी धार्मिक अनुष्ठान कराए था। लक्ष्मीकांत दीक्षित पूजा पद्धति में सिद्धहस्त और वाराणसी के मीरघाट स्थित सांगवेद महाविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य रहे थे। लक्ष्मीकांत के निधन पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दुख जाहिर किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्ष्मीकांत दीक्षित ‌के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि, “देश के मूर्धन्य विद्वान और साङ्गवेद विद्यालय के यजुर्वेदाध्यापक लक्ष्मीकान्त दीक्षित जी के निधन का दुःखद समाचार मिला। दीक्षित जी काशी की विद्वत् परंपरा के यशपुरुष थे। काशी विश्वनाथ धाम और राम मंदिर के लोकार्पण पर्व पर मुझे उनका सान्निध्य मिला। उनका निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।”

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