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यश की ‘टॉक्सिक’ पर विवादों का साया, जानिए क्या है पूरा मामला
जंगल की जमीन को लेकर राज्य और केंद्र आमने-सामने
बेंगलुरु। केजीएफ मूवी से प्रसिद्धि पाने वाले अभिनेता यश की आगामी फिल्म टॉक्सिक अभी रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान वन भूमि पर पेड़ों की कटाई का आरोप लगा है, जिससे कर्नाटक वन विभाग और हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) के बीच तनातनी बढ़ गई है।
कहा जा रहा है कि फिल्म के सेट के निर्माण के लिए सैकड़ों पेड़ काटे गए हैं, जिसकी पुष्टि होते ही वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा है, जिसमें 599 एकड़ वन भूमि पर चिंता जाहिर की गई है।
वन भूमि का मामला: राज्य और केंद्र में टकराव
599 एकड़ में फैली यह जमीन वर्तमान में एचएमटी के अधिकार में है, जो पहले एक रिजर्व फॉरेस्ट लैंड थी। इसे एचएमटी को एक राजपत्र अधिसूचना के तहत स्थानांतरित किया गया था, लेकिन बिना किसी औपचारिक घोषणा के। राज्य सरकार का कहना है कि तकनीकी रूप से यह क्षेत्र अभी भी जंगल है। इस पर कर्नाटक राज्य सरकार का वन विभाग दोबारा अधिकार चाहता है।
वन भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए मंत्री खंड्रे ने कहा, “एक जंगल हमेशा जंगल ही रहेगा, जब तक कि इसे अधिसूचना द्वारा मुक्त न कर दिया जाए।” वहीं, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने एचएमटी के पक्ष में कहा है कि एचएमटी कानूनी रूप से इस संपत्ति का मालिक है और इसे वापस लेना उचित नहीं है।

खंड्रे ने अपनी चिट्ठी में आगे कहा गया है कि एचएमटी बिजनस के लिहाज से जमीन को किराए पर दे रही है, जिसमें ‘टॉक्सिक’ नाम की एक प्रोडक्शन की फिल्म भी शामिल है। उन्होंने दावा किया है कि फिल्म के लिए जंगल में बड़ी मात्रा में कटाई की गई है। यह वन में कटाई की सीमा का उल्लंघन है। उन्होंने इसके लिए सैटेलाइट तस्वीरों से तुलना की बात की है। खंड्रे ने कहा कि यदि पेड़ों को बिना मंजूरी के काटा गया है, तो यह वन कानून के उल्लंघन का मामला है।
फिल्म टॉक्सिक की टीम ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। कर्नाटक वन विभाग और एचएमटी के बीच इस भूमि पर अधिकार को लेकर कानूनी विवाद अब और गंभीर हो सकता है।
