वाराणसी
मां सौभाग्य गौरी को अर्पित हुए वस्त्र-श्रृंगार, वैदिक विधि से संपन्न हुआ पूजन
वाराणसी। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन काशी विश्वनाथ धाम में आस्था और परंपरा का मनोहारी दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर श्री विश्वेश्वर (भगवान काशी विश्वनाथ) के समक्ष विधिवत अवलोकन कराने के पश्चात मां सौभाग्य गौरी को धारण हेतु वस्त्र एवं श्रृंगार सामग्री अर्पित की गई। मंदिर के शास्त्रियों ने वैदिक विधान के अनुसार पूजन संपन्न कराया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा।

इस पावन अवसर पर मां सौभाग्य गौरी के साथ शक्तिपीठ माता विशालाक्षी को भी वस्त्र और श्रृंगार सामग्री समर्पित की गई। काशी की धार्मिक परंपरा में यह आयोजन विशेष महत्व रखता है, जिसमें भगवान विश्वनाथ की साक्षी में मां गौरी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार नवरात्र के शेष दिनों में भी यह विशेष क्रम जारी रहेगा। प्रत्येक दिन मां गौरी के निर्धारित स्वरूप के अनुसार वस्त्र एवं श्रृंगार सामग्री पहले श्री विश्वेश्वर को अवलोकित कराकर अर्पित की जाएगी और फिर उपहार स्वरूप भेजी जाएगी। यह परंपरा पूरे नवरात्र पर्व तक निरंतर चलती रहेगी।

यह आयोजन सनातन धर्म की गहरी आस्था, परंपरा और धार्मिक विधानों का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। नवरात्र के दौरान काशी में होने वाले ऐसे अनुष्ठान न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं, बल्कि श्रद्धालुओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ते हैं।

नवरात्र के इस विशेष अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम और आसपास के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्त पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मां की उपासना में लीन दिखाई दे रहे हैं, जिससे काशी का वातावरण पूरी तरह भक्तिरस में डूबा हुआ नजर आ रहा है।
