वाराणसी
महिला से छेड़खानी के आरोप में कबीर मठ के महंत को जेल, अनुयायियों ने बताया दूसरा वजह
वाराणसी। कबीर मठ के महंत विवेक दास को महिला से अश्लीलता करने के मामले में जज ने जेल भेज दिया। वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय के एससी/एसटी कोर्ट में जज अनिल कुमार पंचम ने महिला की ओर से दायर परिवाद की सुनवाई की। इसके बाद विशेष न्यायाधीश ने महंत की अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया। इस मामले में महिला ने थाने में केस नहीं दर्ज किए जाने पर कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था। न्यायालय ने आरोपी को कोर्ट में तलब किया था। इसके बाद आरोपी के खिलाफ पीड़ित पक्ष के वकील ने मजबूत साक्ष्य पेश किया। जज ने न्यायिक रिमांड पर 14 दिन के लिए जेल भेज दिया। महंत विवेक दास पर साल 2022 में चेतगंज थाने में छेड़छाड़, मारपीट और धमकी संबंधित मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मुकदमे में महंत विवेक दास अग्रिम जमानत पर चल रहे थे। साथ ही कोर्ट में केस की नियमित सुनवाई भी चल रही थी।
जानकारी के अनुसार, मार्च 2022 में दाखिल परिवार में महिला ने कबीर मठ के महंत विवेक दास पर अश्लीलता का आरोप लगाते हुए कहा था कि, वह कबीरचौरा मठ में गई थी। वहां पर महंत ने अपने साथियों की मौजूदगी में अश्लील टिप्पणियां की। तब उस वक्त एससी/एसटी कोर्ट ने वारंट जारी करते हुए महंत को तलब किया था, लेकिन उसकी याचिका पर अग्रिम जमानत दे दी।

3 मार्च 2024 को अग्रिम जमानत अवधि समाप्त होने के साथ महंत विवेक दास कोर्ट में पहुंचे और जमानत याचिका दायर की। उन्होंने बीमारी और हार्ट सर्जरी के चलते जमानत की गुहार लगाई, हालांकि जज अनिल कुमार पंचम ने याचिका को रद्द करते हुए जमानत खारिज कर दी। कड़ी सुरक्षा के बीच महंत को जिला कारागार में निरुद्ध किया गया।
वहीं इस मामले में कबीर मठ मूलगादी कबीरचौरा के महंत विवेक दास के खिलाफ दर्ज परिवाद और महंत को जेल जाने पर अनुयायियों में रोष है। कबीर मठ मूलगादी के उत्तराधिकारी प्रमोद दास ने बताया कि, महिला का आरोप पूरी तरह से मनगढंत है। उसने फर्जी मामला पेश किया है। क्योंकि पूरा विवाद अश्लीलता नहीं बल्कि जमीन और मठ की संपत्ति पर कब्जा करने का है। महिला के मन में लालच है। फिलहाल हम न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे और कोर्ट में जमानत की गुहार लगाएंगे।
