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गाजीपुर

मकर संक्रांति पर्व की तैयारियां जोरों पर, चाइनीज मांझे की बिक्री बनी चिंता का कारण

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बहरियाबाद (गाजीपुर)। नए साल का पहला त्योहार मकर संक्रांति नजदीक है और इसकी तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने इस दिन पतंग उड़ाई थी, जो इंद्रलोक तक पहुंच गई थी। तभी से यह परंपरा पतंग उत्सव के रूप में मनाई जाती है।

आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों का नजारा
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना न केवल परंपरा है, बल्कि यह आजादी और शुभ संकेत का प्रतीक भी माना जाता है। रंग-बिरंगी पतंगों से सजे आसमान की शोभा इस दिन देखते ही बनती है। बच्चे और युवा इस उत्सव का बेसब्री से इंतजार करते हैं। पतंग उड़ाना न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।

मकर संक्रांति ठंड के मौसम में मनाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान धूप में पतंग उड़ाने से विटामिन डी की प्राप्ति होती है और सर्दियों में होने वाले चर्म रोगों से बचाव संभव है। पतंग उड़ाने से मानसिक संतुलन और दिल को खुशी का एहसास होता है।

चाइनीज मांझा बना खतरा
त्योहार की तैयारी के बीच प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की खुलेआम बिक्री चिंता का विषय बनी हुई है। इस मांझे से बच्चे और अन्य लोग घायल हो रहे हैं। जहां एक समय कॉटन के धागे से बने मांझे का इस्तेमाल किया जाता था, वहीं अब चाइनीज मांझे के कारण गंभीर दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन की ओर से चाइनीज मांझे पर रोक के बावजूद इसकी बिक्री धड़ल्ले से हो रही है।

दुकानों पर पतंगों की रौनक
क्षेत्र के दुकानदारों के यहां पतंग और मांझे की बिक्री जोरों पर है। पतंगों के विभिन्न डिजाइनों और रंगों ने बाजार की रौनक बढ़ा दी है। बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी पतंगों की खरीदारी में जुटे हैं।

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जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मकर संक्रांति का पर्व सुरक्षित तरीके से मनाएं और चाइनीज मांझे के बजाय पारंपरिक मांझे का उपयोग करें। साथ ही, प्रशासन ने चाइनीज मांझे की बिक्री पर सख्ती बरतने का निर्देश दिया है।

मकर संक्रांति का यह पर्व न केवल आस्था और परंपरा का हिस्सा है, बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां बांटने का भी मौका है। ऐसे में जरूरी है कि लोग जिम्मेदारी के साथ इस त्योहार को मनाएं और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

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