वाराणसी
भोजपुरी भाषा का भविष्य उज्जवल एवं गौरवशाली: डॉ. अशोक सिंह
भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की प्रधानमंत्री से अपील
वाराणसी। सुंदर सरस तथा मधुर भाषा की बात की जाए तो भोजपुरी भाषा सबसे समृद्ध व सर्वोपरि है इस भाषा को बोलने वालों की संख्या भारत की समृद्ध भाषा कहीं जाने वाली बांग्ला, गुजराती और मराठी आदि अन्य क्षेत्रीय भाषाओं से किसी भी मामले में कम नहीं है। इस दृष्टि से इस भाषा का महत्व बहुत अधिक है साथ ही इसका भविष्य उज्जवल और गौरवशाली दिखाई देता है। यह बातें विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रमुख चिकित्सा संस्थान सिंह मेडिकल एंड सर्जिकल सेंटर मलदहिया वाराणसी के प्रबंध निदेशक तथा जीवनदीप ग्रुप आफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार सिंह ने गुरुवार को पत्रकारों से एक विशेष भेंट के दौरान कही।
उन्होंने देश के प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी के वाराणसी आगमन पर उनका स्वागत करते हुए कहा की जिस प्रकार प्रधानमंत्री राष्ट्र के समग्र विकास एवं भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए सतत प्रयत्नशील हैं। उसी प्रकार यदि भोजपुरी भाषा को चुनाव के पूर्व आठवीं अनुसूची में शामिल कर दें तो भोजपुरी भाषी करोड़ों देशवासियों विशेष कर बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित देश-विदेश के विभिन्न भागों में रहने वाले करोड़ों लोगों की बहु प्रतीक्षित मांग पूरी हो जाएगी। जिसका लाभ वर्ष 2024 के चुनाव में और अधिक भाजपा को मिल सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि, वर्ष 1996 में पहली बार जगदीश गोवर्धन जी जो मॉरीशस के सहकारिता मंत्री थे। उन्होंने 10 भोजपुरी बोलने वाले देशों का मॉरीशस में सम्मेलन कराया था, उसके बाद वर्ष 2001 में मैंने भी 10 देश का यूथ फेस्टिवल वाराणसी में कराया। वर्ष 1996 से अभी तक आठ बार मॉरीशस सरकार के आमंत्रण पर मैं भोजपुरी कार्यक्रमों मैं भाग ले चुका हूं। वर्ष 2014 में भोजपुरी के विकास के लिए कला एवं संस्कृति मंत्रालय मॉरीशस द्वारा मुझे और अन्य चार लोगों को भोजपुरी के योगदान के लिए निवर्तमान राष्ट्रपति स्वर्गीय अनिरुद्ध जगन्नाथ के हाथों राष्ट्रपति भवन में विश्व भोजपुरी सम्मान प्रदान किया जा चुका है। मॉरीशस की राजकीय भाषा क्रिओल एवं फ्रेंच होने के बावजूद जगदीश गोवर्धन के अनुरोध पर मैंने एमएलसी कैलाश सिंह, विजय यादव सहित 10 लोगों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भोजपुरी को राजकीय भाषा बनाने के जागरूकता आंदोलन में भागीदारी की।

यह आंदोलन मॉरीशस के आठ जिलों में लगभग 2000 से 4000 की भीड़ के साथ किया गया इस आंदोलन को देखते हुए मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अनिरुद्ध जगन्नाथ ने महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट के सभागार में सभी प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए अपने मंत्रियों सहित आकर यह घोषणा की कि चुनाव जीतने के बाद मैं भोजपुरी भाषा को राजकीय भाषा अवश्य बना दूंगा और उन्होंने बहुमत से चुनाव जीतने के बाद भोजपुरी को मॉरीशस की राजकीय भाषा का दर्जा दे दिया। इसके अलावा स्वर्गीय परमहंस त्रिपाठी द्वारा स्थापित एवं उनके पुत्र पूर्व गृह सचिव महाराष्ट्र सतीश त्रिपाठी जी के निर्देशन में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के विकास के लिए बहुत कार्य किए गए जिसमें दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में भोजपुरी अकादमी की स्थापना हुई तथा छठ पर्व को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया साथ ही उत्तर प्रदेश और बिहार में भोजपुरी अकादमी की स्थापना कराई गई एवं बिहार के कई विश्वविद्यालय , वर्धा विश्वविद्यालय में इसका पठन-पाठन शुरू हो गया।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में भी मेरे प्रयास से पूर्व कुलपति पंजाब सिंह एवं प्रो. डीपी सिंह के सहयोग से भोजपुरी अध्ययन केंद्र स्थापित किया गया जिसमें तन मन धन से मैंने भरपूर सहयोग कियाभोजपुरी अध्ययन केंद्र अभी भी हिंदी विभाग के अधीन चलाया जा रहा है जबकि सुंदरपुर नारियां स्थित बीएचयू कैंपस में श्री मीरा कुमार पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने अलग से भोजपुरी केंद्र का उद्घाटन किया था। हिंदी भाषी लोगों द्वारा भोजपुरी भाषा का विरोध किया जाता है जबकि भोजपुरी हिंदी से हजारों वर्ष पहले से बोली जाती है।
डॉ अशोक सिंह ने भोजपुरी के महत्व एवं विस्तार की चर्चा करते हुए आगे कहा कि भारतीय लोक भाषाओं को संरक्षित करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने अद्भुत कार्य किया और 50 लाख से लेकर दो करोड़ लोगों द्वारा बोले जाने वाली संथाली, मैथिली, तेलुगू, बांग्ला आदि भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल कर लिया गया, लेकिन 20 देश में बोली जाने वाली भोजपुरी भाषा को व्याकरण व शब्दकोश के नाम पर आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया l पीएम मोदी यदि इस कार्य को पूरा कर देते तो भोजपुरी भाषी लोगों के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होती क्योंकि विश्व भोजपुरी सम्मेलन के प्रयास से व्याकरण शब्दकोश, भोजपुरी- हिंदी डिक्शनरी,भोजपुरी- हिंदी -अंग्रेजी डिक्शनरी का निर्माण अब कराया जा चुका है साथ ही अन्य आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई है।
लोकसभा एवं राज्यसभा में रघुवंश प्रसाद सिंह, लालू प्रसाद यादव, शत्रुघ्न सिन्हा, योगी आदित्यनाथ, जगदंबिका पाल, नीरज शेखर , मनोज तिवारी, रवि किशन एवं दिनेश लाल द्वारा भोजपुरी भाषा को आठवीं सूची में शामिल करने के लिए कई बार प्रस्ताव लाया गया लेकिन फिर भी यह कार्य नहीं हो पाया जिससे भोजपुरी भाषी लोग निराश है l लगभग 8 करोड़ यूपी के 32 जिलों में पांच करोड़ बिहार के 10 जिलों सहित दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, ओमान, कतर, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में भारी संख्या में भोजपुरी भाषी लोग रहते हैं इस दृष्टिकोण से यदि देखा जाए तो वर्तमान केंद्र सरकार यदि भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कर लेती है तो इसका राजनीतिक लाभ मिलने से कोई रोक नहीं सकता।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी को मैंने तीन पत्रक दिया कि भोजपुरी अकादमी कार्य ठीक ढंग से कराया जाए तथा भोजपुरी को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया जाए। भारतीय संविधान में प्रदेश सरकारों को आर्टिकल 345 ,346 एवं 347 में यह अधिकार प्राप्त है कि राज्य सरकार राजभाषा का दर्जा दे सकती है। झारखंड जैसे प्रदेश में भोजपुरी को यह दर्जा प्राप्त है। अतः प्रधानमंत्री से मेरा विनम्र आग्रह है कि भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करें, ताकि बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि अन्य राज्यों सहित देश-विदेश में रहने वाले भोजपुरी भाषी लोगों को न्याय मिल सके।
