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गाजीपुर

भरभुंजा समाज के पारंपरिक धंधे पर संकट, रोजगार के लिए पलायन कर रहे युवा

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गाजीपुर (जयदेश)। जनपद के बहरियाबाद क्षेत्र और आसपास के गांवों में बसने वाले भरभुंजा समाज के सामने आज बड़ा संकट खड़ा हो गया है। परंपरागत रूप से अनाज भूनने का काम करने वाले इस समाज का मुख्य धंधा विलुप्ति के कगार पर है। इसका सीधा असर उनके परिवारों के जीवन-यापन पर पड़ा है और उनकी आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है।

भरभुंजा समाज के लोग मिट्टी के विशेष चूल्हे में अनाज भूनने का काम करते थे, जो कई प्रकार के अनाजों को भूनने के लिए इस्तेमाल होता था। मकर संक्रांति जैसे त्योहारों पर गांव की महिलाएं धान से चूड़ा और लाई बनवाने के लिए इन्हीं के पास आती थीं। भुना हुआ अनाज स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है।

मशीनरी युग में पारंपरिक हुनर की अनदेखी
लेकिन आज मशीनों के बढ़ते उपयोग ने इस परंपरागत धंधे को गहरा झटका दिया है। लोग अब मशीनों पर चूड़ा और लाई बनवाना पसंद कर रहे हैं, जो स्वाद और गुणवत्ता में पिछड़ने के बावजूद आसानी से बाजार में उपलब्ध है। इससे भरभुंजा समाज के कारीगरों का काम लगभग ठप हो गया है।

पलायन को मजबूर हो रहे हैं युवा, सरकारी उपेक्षा ने बढ़ाई समस्या
रोजगार के अभाव में इस समाज के युवा अब गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि परंपरागत हुनर को बचाने के लिए सरकारी संरक्षण की सख्त जरूरत है।

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भरभुंजा समाज के लोगों का कहना है कि उन्हें कोई सरकारी सहयोग नहीं मिल रहा है। यदि इस समुदाय को सही संरक्षण और प्रोत्साहन दिया जाए, तो उनका पारंपरिक व्यवसाय पुनर्जीवित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार भरभुंजा समाज के पारंपरिक व्यवसाय को बचाने के लिए कदम उठाए, तो न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि गांवों में पारंपरिक विरासत भी जीवित रह सकेगी। यह आवश्यक है कि सरकार और समाज दोनों मिलकर इस धरोहर को बचाने के लिए प्रयास करें, ताकि भरभुंजा समाज के लोग सम्मानजनक जीवन जी सकें और उनकी कला अगली पीढ़ियों तक पहुंचे।

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