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मुम्बई

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश से बिन ब्याही मां को वापस मिली 2 माह की बच्ची, पढ़ें पूरी खबर

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के लिए आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट ने एक अविवाहित मां के समर्पण विलेख को रद्द करने और उसे उसके दो महीने के बच्चे की अभिरक्षा देने को कहा है। न्यायमूर्ति नितिन बोरकर और न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरेसन ने यह आदेश दिया है। संस्था द्वारा बेटी को वापस न दिए जाने से परेशान महिला ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने सीडबल्यूसी को इस बारे में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

महिला ने दावा किया था कि जिस संस्था की निगरानी में उसने बच्ची को जन्म दिया था, उसने अंधरे में रखकर उससे सरेंडर डीड साइन कराई थी। संस्था से बार-बार आग्रह किए जाने के बावजूद बेटी नहीं लौटाई गई। याचिका में महिला ने दावा किया था कि वह बेटी के खुद से दूर होने के चलते ठीक से रह नहीं पा रही है। भावनात्मक रूप से वह काफी दुखी है।

दरअसल, महिला विदेश में नौकरी के दौरान एक शख्स के साथ संबंध के चलते गर्भवती हो गई थी। 6 माह तक गर्भावस्था के बारे में उसे पता नहीं चला। जब वह भारत आई तो उसे एक संस्था के बारे में जानकारी मिली। उसने 29 मार्च 2024 को इस संस्था में बच्ची को जन्म दिया था। महिला का दावा है कि उसे अंधरे में रखकर संस्था ने कई दस्तावेजों पर साइन करा लिए थे। उससे 5 अप्रैल 2024 को सरेंडर डीड पर भी हस्ताक्षर लिए गए थे।

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