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वाराणसी

बेटे-बेटी के बाद मां की भी मौत, 40 घंटे बाद थमी सांसें

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वाराणसी। शहर के लहरतारा क्षेत्र में 24 मार्च को हुए सिलेंडर विस्फोट में घायल 60 वर्षीय गिरजा देवी ने भी बीती रात उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इससे पहले इसी हादसे में उनके बेटे ओम कुमार चौधरी और बेटी प्रीति की मौत हो चुकी थी। लगभग 40 घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद गिरजा देवी के निधन से परिवार में मातम पसरा हुआ है। पोस्टमार्टम के बाद उनका शव परिजनों को सौंपा जाएगा।

घटना के बाद से गिरजा देवी और उनके बड़े बेटे अमन का इलाज बीएचयू ट्रामा सेंटर में चल रहा था। गिरजा देवी को गंभीर चोटें आई थीं और उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। देर रात इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं। मौत की सूचना मिलते ही परिजन ट्रामा सेंटर पहुंच गए, जहां पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया।

इस हादसे में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। विस्फोट में छोटे बेटे ओम कुमार चौधरी और बेटी प्रीति की मौके पर ही जान चली गई थी, जबकि गिरजा देवी और बड़े बेटे अमन मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हुए थे। अब गिरजा देवी के निधन के बाद परिवार में केवल अमन ही जीवित बचा है, जिसका अस्पताल में इलाज जारी है और उसकी हालत भी गंभीर बताई जा रही है।

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24 मार्च की सुबह करीब 7 बजकर 27 मिनट पर चाय बनाते समय गैस सिलेंडर में विस्फोट हुआ था। धमाका इतना भीषण था कि पूरा मकान ढह गया और आसपास के कई घरों में दरारें पड़ गईं। उस समय घर में परिवार के चार सदस्य मौजूद थे, जिनमें दो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। मलबे में दबे सभी लोगों को निकालकर बीएचयू ट्रामा सेंटर भेजा गया था।

बताया जा रहा है कि करीब 50 साल पुराना यह मकान काफी जर्जर था। मकान के पिछले हिस्से का निर्माण हाल ही में कराया गया था और उसकी फिनिशिंग का काम चल रहा था, जबकि सामने का लगभग 400 वर्गफीट का हिस्सा जर्जर स्थिति में था। हादसे के समय परिवार के सभी सदस्य इसी हिस्से में मौजूद थे। सुबह के वक्त गिरजा देवी रसोई में खाना बना रही थीं, तभी सिलेंडर से गैस रिसाव होने लगा और पाइप में आग लग गई। इससे पहले कि वे कुछ समझ पातीं, तेज धमाका हुआ और पूरा मकान भरभराकर गिर पड़ा।

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