गोरखपुर
बेटियों की पढ़ाई पर साया बना डर, वार्डेन पर अभिभावकों का गंभीर आरोप
गोरखपुर के उसवा क्षेत्र में स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय एक बार फिर विवादों में है। विद्यालय की वार्डेन अर्चना पांडेय के खिलाफ उसवा बाबू सहित आसपास के गांवों के दर्जनों अभिभावकों ने एकजुट होकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं जिलाधिकारी गोरखपुर को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा है। अभिभावकों ने साफ शब्दों में या तो वार्डेन का तत्काल स्थानांतरण करने या फिर अपने बच्चों का ट्रांसफर सर्टिफिकेट देने की पुरजोर मांग की है।
अभिभावकों का आरोप है कि वार्डेन अर्चना पांडेय का व्यवहार अत्यंत अमर्यादित, अपमानजनक और डर पैदा करने वाला है। मीडिया से बातचीत में अभिभावक सुनीता ने भावुक होकर बताया कि “हमारे बच्चे शिक्षा ग्रहण करने स्कूल जाते हैं, लेकिन वहां उन्हें मानसिक प्रताड़ना और दहशत का सामना करना पड़ता है। बच्चे भय के माहौल में जी रहे हैं और पढ़ाई से दूर होते जा रहे हैं।”
यह स्थिति उस सरकारी नारे पर करारा तमाचा है, जिसमें कहा जाता है— बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ। अभिभावकों का कहना है कि यदि विद्यालय में तैनात जिम्मेदार शिक्षिकाएं ही बेटियों के साथ ऐसा व्यवहार करेंगी, तो सरकारी योजनाओं का उद्देश्य कैसे पूरा होगा? अर्चना पांडेय जैसे रवैये के कारण बेटियों की शिक्षा बाधित हो रही है और उनका भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिकायतों के बावजूद विभाग आंख मूंदे बैठा है। न तो मामले की जांच हो रही है और न ही बच्चों को विद्यालय से ट्रांसफर सर्टिफिकेट दिया जा रहा है। इससे अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह सीधे-सीधे बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है।
एक महिला अभिभावक ने आक्रामक लहजे में कहा कि “यदि हमारी बात नहीं सुनी गई तो हम सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।” उन्होंने मांग की कि अर्चना पांडेय को तत्काल यहां से दूर स्थानांतरित किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
अब सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा? क्या बेटियों की चीखें और अभिभावकों की पीड़ा भी व्यवस्था को झकझोर नहीं पाएगी? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
