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गोरखपुर

बिजली निगम का टेंडर क्लर्क पांच हजार घूस लेते गिरफ्तार

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गोरखपुर। विद्युत वितरण मंडल द्वितीय में कार्यालय सहायक (वर्तमान में टेंडर क्लर्क) के पद पर तैनात अभिषेक भारती को एंटी करप्शन टीम ने पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि वह पांच लाख रुपये की फिक्स्ड डिपाजिट रसीद (एफडीआर) लौटाने के एवज में रुपये की मांग कर रहे थे। जिस स्थान पर गिरफ्तारी हुई, वहीं एंटी थेफ्ट बिजली थाना भी स्थित है। अभिषेक भारती महराजगंज जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नगरपालिका परिषद के नेहरूनगर के निवासी बताए गए हैं।

गोरखनाथ के गांधीनगर निवासी ठीकेदार शिव कुमार त्रिपाठी के मुताबिक सिकरीगंज, कौड़ीराम और सहजनवां खंड में काम पूरा होने के बाद वह एफडीआर वापस लेने के लिए लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन टेंडर क्लर्क अभिषेक भारती लगातार रुपये की मांग कर रहे थे। शिव कुमार त्रिपाठी ने बताया कि छह जनवरी को अधीक्षण अभियंता दीपक कुमार से एफडीआर जारी कराने का आदेश लेकर वह टेंडर क्लर्क को सौंप चुके थे, इसके बावजूद एफडीआर नहीं मिल रही थी। परेशान होकर उन्होंने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से की।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बुधवार दोपहर करीब 12:20 बजे नीले रंग की सूमो गाड़ी मोहद्दीपुर में विद्युत वितरण मंडल प्रथम के कार्यालय के सामने आकर रुकी। कुछ देर बाद गाड़ी आगे बढ़ गई और उसके आगे एक युवक बाइक से चलता दिखा। बताया गया कि वही युवक टीम को विद्युत वितरण मंडल द्वितीय के कार्यालय के पास पहुंचाकर वापस चला गया।

इसके बाद दोपहर करीब 12:30 बजे ठीकेदार शिव कुमार त्रिपाठी ने प्रथम तल पर स्थित कार्यालय में बैठे टेंडर क्लर्क अभिषेक भारती को फोन कर नीचे बुलाया। जैसे ही अभिषेक भारती कार्यालय के नीचे पहुंचे, शिव कुमार त्रिपाठी ने उनके कंधे पर हाथ रखकर कुछ देर बातचीत की और फिर पांच हजार रुपये उनके हाथ में थमा दिए। रुपये लेते ही निरीक्षक सुबोध कुमार के नेतृत्व में मौजूद सात से आठ लोगों ने अभिषेक भारती को हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें तत्काल सूमो गाड़ी में बैठाकर कैंट थाने ले जाया गया।

टेंडर क्लर्क को पकड़ने के बाद टीम के सदस्य उनके कार्यालय पहुंचे और कर्मचारियों से कार्यालय बंद कराते हुए वहां ताला लगवा दिया। ताले पर तिथि और हस्ताक्षरयुक्त पर्ची भी चिपकाई गई। करीब एक घंटे बाद टीम दो गाड़ियों से दोबारा लौटी और ताला खोलकर कार्यालय की जांच की। इस दौरान अधीक्षण अभियंता द्वितीय का कार्यभार देख रहे अधीक्षण अभियंता प्रथम केके राठौर को बुलाया गया और कुछ फाइलों की फोटोकापी कराई गई। माना जा रहा है कि इन फाइलों में ठीकेदार शिव कुमार त्रिपाठी की एफडीआर से संबंधित दस्तावेज शामिल थे।

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बताया जा रहा है कि चार दिन पहले भी शिव कुमार त्रिपाठी और अभिषेक भारती के बीच कार्यालय में बहस हुई थी। ठीकेदार का आरोप है कि क्लर्क ने कहा था कि बिना रुपये लिए एफडीआर नहीं देंगे और यह भी कहा था कि “आपको जो करना हो कर लीजिए, आपकी कृपा से नौकरी नहीं मिली है।” हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि विवाद की वजह लेन-देन नहीं, बल्कि गाली-गलौज से जुड़ा मामला था। चर्चा है कि ठीकेदार ने दूसरे ठीकेदार से मोबाइल फोन पर बातचीत के दौरान अभिषेक भारती को लेकर कुछ कहा था, जिसका ऑडियो ठीकेदार ने अभिषेक भारती को सुना दिया था, इसके बाद बात बिगड़ गई।

जानकारी के मुताबिक, टेंडर क्लर्क की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने गुरुवार को उसे कोर्ट में पेश किया। इसके बाद विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। नियम के अनुसार गिरफ्तारी के 48 घंटे के भीतर निलंबन की प्रक्रिया की जाती है और संभावना जताई जा रही है कि गुरुवार को अभिषेक भारती को निलंबित कर दिया जाएगा। बिजली निगम की व्यवस्था के मुताबिक निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद अभिषेक भारती की तैनाती गोरखपुर जोन में नहीं हो सकेगी और उन्हें किसी अन्य जोन में भेजा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले नवंबर 2023 में सूरजकुंड उपखंड के कार्यकारी सहायक संदीप कुमार को भी एंटी करप्शन टीम ने 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वह आरओ प्लांट संचालक के परिसर में लगे खराब मीटर का अधिक बिल बनाकर उसे कम कराने के नाम पर रुपये ले रहा था। उस प्रकरण में तत्कालीन एसडीओ पर भी आरोप लगे थे और बताया गया था कि एसडीओ मौके से फरार होने के बाद बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो गए थे।

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