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वाराणसी

बाबू जगत सिंह के उत्खनन को ASI ने दी आधिकारिक मान्यता

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वाराणसी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) नई दिल्ली ने प्रमाणिक दस्तावेज़ों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अध्ययन के बाद यह स्वीकार किया है कि वाराणसी के सारनाथ स्थल को सबसे पहले बाबू जगत सिंह द्वारा कराए गए उत्खनन से प्रकाश में लाया गया था। इसी के तहत सारनाथ परिसर में संशोधित शिलापट्ट भी स्थापित किया गया है।

जानकारी के अनुसार, बाबू जगत सिंह ने अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सारनाथ क्षेत्र में उत्खनन कार्य की शुरुआत कराई थी। लंबे समय तक यह तथ्य इतिहास में दबा रहा, लेकिन जगत सिंह रॉयल फैमिली शोध समिति द्वारा प्रस्तुत प्रमाणों के आधार पर अब इसे आधिकारिक मान्यता मिल गई है।

शोध समिति के संरक्षक और बाबू जगत सिंह की छठी पीढ़ी के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने बताया कि यह निर्णय काशी और देश की ऐतिहासिक विरासत के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि शोध कार्य अभी भी जारी है और जल्द ही नए तथ्य सामने लाए जाएंगे।

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पत्रकार वार्ता में अधिवक्ता त्रिपुरारी शंकर, प्रो. राणा पीबी सिंह, अरविंद कुमार सिंह, अशोक आनंद, डॉ. (मेजर) अरविंद कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार दुबे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इतिहासकारों का मानना है कि इस निर्णय से सारनाथ के इतिहास को नया आयाम मिला है और स्थानीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

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