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वाराणसी

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सीएचओ का प्रशिक्षण शुरू

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पहल
• सीएचसी-पीएचसी में 10 मई तक चलेगा प्रशिक्षण सत्र
• फाइलेरिया के सात मरीजों को मिली एमएमडीपी किट

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वाराणसी: जिले में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) का प्रशिक्षण सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया है। यह सत्र अलग-अलग सीएचसी-पीएचसी में 10 मई तक चलेगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी के निर्देशन में शुक्रवार को चिरईगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 23 सीएचओ को प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही फाइलेरिया के सात मरीजों को रुग्णता प्रबंधन व दिव्यांग्ता रोकथाम (एमएमडीपी) किट प्रदान की गई। इस किट में हाथ धोने का साबुन, टब, बाल्टी, मग, तौलिया, ग्लब्स एवं आवश्यक दवा आदि शामिल है। जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद पाण्डेय के नेतृत्व में पाथ संस्था के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ सरीन कुमार और सीफार संस्था के फाइलेरिया जिला समन्वयक सुबोध दीक्षित ने सीएचओ को फाइलेरिया (हाथीपाँव और अंडकोषों में सूजन) के कारण, लक्षण, पहचान, जांच, उपचार व बचाव आदि के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) और एमएमडीपी किट को फाइलेरिया (हाथीपांव) रोगियों के उपयोग के बारे में बताया गया। सीएचओ से कहा गया कि वह एकीकृत निक्षय दिवस पर ओपीडी के दौरान आने वाले फाइलेरिया और कालाजार रोगियों की ई-कवच पोर्टल पर फीडिंग अनिवार्य रूप से करें।
डीएमओ शरदचंद पाण्डेय ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत सीएचओ को फाइलेरिया और कालाजार के नए मरीजों को खोजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मच्छर जनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसके संक्रमण से लिम्फोडिमा (हाथ, पैरों और स्तन में सूजन) और हाइड्रोशील (अंडकोषों में सूजन) रोग होता है। यह न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है बल्कि इस वजह से मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। शुरू में डॉक्टर की सलाह पर दवा का सेवन किया जाए तो बीमारी को बढ़ने से रोक सकते हैं।
इसके अलावा नाइट ब्लड सर्वे में लोगों के ब्लड का सैंपल लेकर फाइलेरिया संक्रमण का पता किया जाता है। इसके परजीवी यानि माइक्रो फाइलेरिया रात में ही सक्रिय होतेहैं। इसमें 20 साल से अधिक आयु की महिलाओं एवं पुरुषों का सैंपल लिया जाता है। सैंपल लेकर रक्त पट्टिका बनाईं जाती हैं। फाइलेरिया प्रभावित अंगों के रुग्णता प्रबंधन का अभ्यास कराया और बताया कि फाइलेरिया के मरीजों के प्रभावित अंग को अच्छी तरह से साफ-सफाई कर रखना चाहिए। इसके लिए उन्हें साफ-सफाई और दवा का सेवन नियमित रूप से करना जरूरी है। सीफार संस्था की ओर से बनाए जा रहे फाइलेरिया नेटवर्क के सदस्य समुदाय को जागरूक कर फाइलेरिया से जुड़े मिथक व भ्रांतियों को दूर कर रहे हैं। इस दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ अमित सिंह, अविनाश सिंह, अभिषेक मिश्रा एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बचाव – मच्छरदानी का प्रयोग करें। घर के आस- पास व अंदर साफ-सफाई रखें, पानी जमा न होने दें और समय-समय पर रुके हुए पानी में कीटनाशक, जला हुआ मोबिल, डीजल का छिड़काव करते रहें।

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