Connect with us

वाराणसी

फर्म सोसाइटीज के लिपिक अरविन्द कुमार गुप्ता की जमानत खारिज

Published

on

Loading...
Loading...

2008 में भी रंगेहाथ पकड़ा जाना अभियुक्त के हैबीचुअल भ्रष्टाचारी होने का स्पष्ट प्रमाण : अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह गौतम

वाराणसी। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-3, वाराणसी की पीठासीन जज सपना शुक्ला के न्यायालय में मुकदमा अपराध संख्या 21, थाना एंटी करप्शन/पांडेयपुर लालपुर, वाराणसी, के अंतर्गत फर्म सोसाइटीज और चिट्स के लिपिक अरविन्द कुमार गुप्ता की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 07, 13(1)(b), और 13(2) के अंतर्गत आरोप तय किए गए हैं। न्यायालय ने अभियुक्त द्वारा लोकसेवक के रूप में भ्रष्टाचार करने और लोकनीति एवं नैतिकता के उल्लंघन की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

शासकीय अधिवक्ता प्रमथेश पाण्डेय और कमलेश यादव ने सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अभियुक्त के अपराध को गंभीर बताते हुए कहा कि लोकसेवक पद पर रहते हुए रिश्वत लेना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है।

शिकायतकर्ता डॉ. संजय सिंह गौतम के अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह गौतम ने यह तर्क दिया कि 2008 में भी अभियुक्त गोरखपुर में रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया था, जो यह साबित करता है कि अभियुक्त एक हैबीचुअल (आदतन) भ्रष्टाचारी है। उन्होंने न्यायालय से अपील की कि लोकसेवक द्वारा किए गए इस गंभीर भ्रष्टाचार को देखते हुए जमानत खारिज की जाए।

गौरतलब है कि प्रबोधिनी फाउंडेशन के संयुक्त सचिव डॉ. संजय सिंह गौतम ने अपनी संस्था के नवीनीकरण और प्रबंध कमेटी सूची पंजीकरण के लिए अभियुक्त द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। इसके बाद एंटी करप्शन विभाग की टीम ने अभियुक्त को 4,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था। यह घटना 11 सितंबर को हुई, जिसके बाद मुकदमा दर्ज कर अभियुक्त को 12 सितंबर को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

Advertisement

विवेचक ने चिट्स फर्म सोसाइटीज कार्यालय का सीसीटीवी वीडियो और अन्य साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए। न्यायालय ने इन तथ्यों और अभियुक्त की जमानत याचिका पर गौर करते हुए पाया कि लोकसेवक द्वारा भ्रष्टाचार का यह कृत्य गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। अभियुक्त की जमानत याचिका अंतर्गत धारा-7, 13(1)(b) एवं धारा-13(2) के अंतर्गत स्वीकार किए जाने योग्य नहीं पाई गई, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज कर दी।

Copyright © 2024 Jaidesh News. Created By Hoodaa

You cannot copy content of this page