गोरखपुर
पेट्रोल के लिए सड़कों पर उमड़ी बेबसी
कागज़ों में सामान्य, ज़मीनी हकीकत में संकट
गोरखपुर जनपद और इसके आसपास के क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल को लेकर एक अजीब सी स्थिति देखने को मिल रही है। जहां एक ओर शासन-प्रशासन यह दावा कर रहा है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। बीते 25 मार्च की दोपहर से ही जिले के कई पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो आम जनमानस की बढ़ती चिंता और परेशानी को साफ दर्शाती हैं।
दक्षिणांचल के नौसढ़, खजनी मार्ग से लेकर बेलघाट, शंकरपुर, कुरी, गोला, उरुवा, सिकरीगंज, महादेवा, दुघरा, उनवल, भटवली, बांसगांव, कौड़ीराम, सहजनवा, पिपराइच, पीपीगंज और चौरीचौरा जैसे अनेक क्षेत्रों से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें सुबह से लेकर देर रात तक बनी हुई हैं। हमारे संवाददाताओं ने जब मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया तो पाया कि लोग घंटों इंतजार करने के बाद भी पेट्रोल पाने को लेकर असमंजस में हैं।
आम जनता के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। कोई अपने रोज़गार के लिए परेशान है तो कोई जरूरी कामों के लिए ईंधन न मिलने से असहाय महसूस कर रहा है। इस बीच गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा और देवरिया के जिलाधिकारी ने जनता से अपील करते हुए कहा है कि पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और इस तरह की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है।
लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि स्थिति सामान्य है तो फिर सड़कों पर यह लंबी कतारें क्यों? आखिर क्यों आम आदमी को पेट्रोल के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है? प्रशासनिक दावों और जमीनी सच्चाई के बीच यह अंतर लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर रहा है।
वर्तमान हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जरूरत है सही जानकारी और पारदर्शिता की, ताकि जनता में फैली आशंका और असमंजस दूर हो सके। फिलहाल तो हालात यही कह रहे हैं कि पेट्रोल की तलाश में निकला आम आदमी आज खुद को असहाय और परेशान महसूस कर रहा है।
