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वाराणसी

पुलिस जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल, शिकायतकर्ता ने दर्ज कराई असहमति

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वाराणसी। चौबेपुर थाना क्षेत्र में दर्ज दो मुकदमों की पुलिस जांच रिपोर्ट पर सवाल उठ खड़े हो गए हैं। जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत के निस्तारण से असंतुष्ट शिकायतकर्ता ने असहमति का फीडबैक अपलोड किया है। आरोप है कि चाँदपुर पुलिस चौकी के एक दरोगा ने मामले की निष्पक्ष विवेचना नहीं की।

यह मामला चौबेपुर थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 341/2025 और 344/2025 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन मुकदमों में उसके और उसके दो भतीजों के नाम द्वेषवश दर्ज किए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, विवेचक को संबंधित प्रमाण उपलब्ध कराए जाने के बावजूद चार्जशीट से उनके नाम नहीं हटाए गए।

रामचन्दीपुर निवासी कपिलदेव यादव द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों में छितौना के कुछ लोगों के साथ सुनील, आशीष और रोहित यादव को भी नामजद किया गया था। आरोपित युवकों ने विवेचक को एक वीडियो साक्ष्य भी सौंपा था। वीडियो में वादी कपिलदेव यादव स्वयं यह स्वीकार करते दिख रहे हैं कि उन्होंने बिना पढ़े प्रार्थनापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसके कारण तीनों युवकों के नाम एफआईआर में दर्ज हो गए।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस महत्वपूर्ण वीडियो साक्ष्य को विवेचना में शामिल नहीं किया गया। आरोप है कि विवेचक ने न तो मोबाइल कॉल डिटेल्स (सीडीआर) की जांच की और न ही आरोपियों की घटनास्थल पर मौजूदगी की पुष्टि की। शिकायतकर्ता का दावा है कि घटना के समय तीनों आरोपी अपने घर पर सो रहे थे।

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि तीनों युवकों ने वादी कपिलदेव यादव को उठाकर छितौना गांव ले जाकर एक कमरे में बंद कर मारपीट की थी।

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इस प्रकरण में शिकायतकर्ता ने पुलिस की निस्तारण रिपोर्ट को खारिज करते हुए जनसुनवाई पोर्टल पर असहमति दर्ज कराई है। साथ ही उच्चाधिकारियों से मामले की पुनः निष्पक्ष विवेचना कराने की मांग की है, ताकि निर्दोष व्यक्तियों को झूठे मुकदमों से राहत मिल सके। वहीं, एसीपी सारनाथ विजय प्रताप सिंह ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच कराई जाएगी।

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