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बलिया

पशुहारी शरीफ में मनाया जाएगा सूफी मोहिउद्दीन चिश्ती रहमानी का 26वां सालाना उर्स

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बलिया। बलिया जनपद के पशुहारी शरीफ में अकीदत और मोहब्बत के साथ सूफी मोहिउद्दीन चिश्ती रहमानी रहमतुल्लाह अलैह का 26वां सालाना उर्स आयोजित होने जा रहा है। इस मौके पर दूर-दराज़ से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचने की उम्मीद है।

कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर की नमाज़ के बाद गुस्ल, चादरपोशी और फातेहाखानी की रस्मों से होगी। शाम के वक्त मिलादे शरीफ का आयोजन रखा गया है, जिसमें सूफी साहब की शिक्षाओं और इंसानियत के पैगाम पर रोशनी डाली जाएगी।

बताया जाता है कि सूफी मोहिउद्दीन मूल रूप से गाजीपुर के रहने वाले थे, लेकिन अपने खादिम व शिष्य जहीर अहमद के आग्रह पर वे बलिया के पशुहारी शरीफ तशरीफ लाए। जहीर अहमद ने अपनी जमीन पर उनकी मजार बनाई, जिसकी खिदमत आज भी पूरी लगन से की जा रही है।पिछले साल उर्स के दौरान एक बड़ी करामात सामने आई थी, जब आठ खुशनसीब लोगों को उनकी शागिर्दी नसीब हुई थी।

इनमें मनव्वर हुसैन, शब्बीर अहमद, इसरार अहमद, जुनैद अहमद, साजिदा परवीन, सद्दाम हुसैन, शहजाद हुसैन और रेहाना खातून शामिल रहे। माना जाता है कि सूफी साहब ने दुनिया से पर्दा करने के 25 साल बाद इनको अपनी मुरीदी में कबूल किया।खादिमों के अनुसार, सूफी मोहिउद्दीन एक सादगी पसंद और बड़े बुजुर्ग थे, जिन्हें कभी दुनियावी चीज़ों से लगाव नहीं रहा।

उनके जानशीन रजी अहमद के मुताबिक, 17 जून 1998 को वे इस फानी दुनिया से रुखसत हुए। उनका सालाना उर्स उनकी याद और पैगाम को ज़िंदा रखने का जरिया है।सूफी साहब की करामातें आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय हैं और उनका फैज़ समाज को राह दिखाने का काम कर रहा है।

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