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वाराणसी

पंचक्रोशी मार्ग पर धर्मशाला में खुली पुलिस चौकी और बरात घर

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रामेश्वर से शिवपुर तक धर्मशालाएं व्यापार का बनीं अड्डा, तीर्थ यात्री बेहाल

वाराणसी के पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग की धार्मिक और सांस्कृतिक पवित्रता पर अतिक्रमण का कड़वा सच सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक, रामेश्वर की धर्मशाला में पुलिस चौकी चलाई जा रही है, जबकि शिवपुर की हनुमान धर्मशाला को वैवाहिक कार्यक्रमों के लिए बरात घर में बदल दिया गया है। तीर्थ यात्रा मार्ग पर स्थित कपिलधारा की धर्मशाला में मिठाई की दुकान खुल गई है और अन्य जगहों पर दुकानों ने धार्मिक स्थलों की जगह हथिया ली है।

रामेश्वर में बनाए गए टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर (टीएफसी) को तीर्थ यात्रियों को निशुल्क सुविधाएं देने के लिए तैयार किया गया था, लेकिन अब वहां पैसे लेकर कमरे दिए जा रहे हैं। ऑक्सीजन क्लब के पदाधिकारियों ने मंडलायुक्त से इसकी शिकायत की है। 8 करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से पर्यटन विभाग द्वारा इन धर्मशालाओं की मरम्मत की गई थी, लेकिन अब इनका उद्देश्य ही खो चुका है।

भीमचंडी में 10 धर्मशालाएं मौजूद हैं, जिनके चारों ओर गंदगी और झाड़ियों का अंबार है। रामलीला मैदान की धर्मशालाओं में भी कब्जा है। कुछ स्थानों पर दुकानें और रेस्टोरेंट चल रहे हैं। राम भट्ट तालाब और द्रौपदी कुंड जैसे ऐतिहासिक स्थल कूड़े-कचरे से पटे पड़े हैं। गोकुल धर्मशाला में टॉयलेट में ताला लगा रहता है, जबकि रामलीला मैदान के दोनों शौचालय क्षतिग्रस्त हैं।

शिवपुर में पांडव मंदिर के मुख्य द्वार को अतिक्रमण से संकुचित कर दिया गया है और मंदिर के चारों ओर दुकानें खुल चुकी हैं। भारतीय शिशु मंदिर में बनी धर्मशाला का भी मूल उद्देश्य खो चुका है। कपिलधारा क्षेत्र की दो मंजिला धर्मशाला में मिठाई की दुकान खुल गई है और सरकारी जमीनों पर कब्जा कर दुकानें बना दी गई हैं। यहां तक कि कुंओं को भी पाटकर व्यवसायिक स्थल बना दिया गया है।

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स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से यह अतिक्रमण लंबे समय से चल रहा है। महंत अनूप तिवारी और अन्य धार्मिक संस्थाओं ने जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग को पत्र लिखकर धर्मशालाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

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