वाराणसी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जयंती पर पांच दिवसीय महोत्सव शुरू
वाराणसी (जयदेश)। भारतीय इतिहास के महान नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिवस पर विशाल भारत संस्थान द्वारा लमही स्थित सुभाष भवन में 5 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सुभाष महोत्सव का आयोजन किया गया। इस महोत्सव की शुरुआत जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ ने सुभाष मंदिर में माल्यार्पण और मशाल जलाकर की।
पहले दिन “नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं उनका समय : वैश्विक राजनीति के संदर्भ में” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलसचिव प्रोफेसर महताब आलम रिजवी ने दीप जलाकर की। इस संगोष्ठी में नेपाल, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, और जापान के शोधकर्ता तथा विभिन्न राज्यों के सुभाषवादी चिंतक और बुद्धिजीवी शामिल हुए।
महोत्सव के मुख्य अतिथि प्रोफेसर मजहर आसिफ ने नई शिक्षा नीति, 2020 पर डॉ. परोमिता चौबे द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया। इसके साथ ही बीएचयू के उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. राजेश सिंह और टीवी पत्रकार आशुतोष सिंह को नेताजी सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
प्रोफेसर मजहर आसिफ को विशाल भारत संस्थान द्वारा सद्भाव के राजदूत और प्रोफेसर महताब आलम रिजवी को राष्ट्रनिर्माण के राजदूत की उपाधि दी गई।
प्रोफेसर मजहर आसिफ ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने नेताजी के जीवन और विचारों को साझा करते हुए कहा कि नेताजी ने भारतवासियों को अपनी संस्कृति से जुड़ने और एकता में विविधता का पालन करने की प्रेरणा दी।
आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने भी नेताजी के दृष्टिकोण को सामने रखते हुए भारत के राष्ट्रीय और सांस्कृतिक जीवन को संवारने की आवश्यकता पर बल दिया।
संगोष्ठी के उद्घाटन कर्ता प्रोफेसर महताब आलम रिजवी ने नेताजी के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और उनके दृष्टिकोण की व्याख्या करते हुए कहा कि नेताजी ने देश की स्वतंत्रता के लिए हर संभव प्रयास किया और विरोधियों के साथ भी हाथ मिलाने में संकोच नहीं किया। आरएसएस के रामाशीष जी ने नेताजी के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की बात कही और उनके योगदान को सम्मानित किया।
इतिहासकार प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह और बीएचयू के प्रोफेसर प्रवेश भारद्वाज ने नेताजी के त्याग और उनके जीवन के अनुशासन पर चर्चा की। मालवीय सेंटर पीस रिसर्च के प्रोफेसर मनोज मिश्रा ने सुभाष के सिद्धांतों की वर्तमान समय में आवश्यकता पर बल दिया।
इस संगोष्ठी में अनेक प्रमुख शख्सियतें शामिल थीं, और कार्यक्रम का संचालन डॉ. निरंजन श्रीवास्तव ने किया। सभी ने इस अवसर पर नेताजी के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
