गोरखपुर
नगर निगम ने बंदर पकड़ने का काम रोका, एजेंसी हटाई गई
मार्च 2025 से अब तक 5000 से अधिक बंदर पकड़े जाने का दावा
गोरखपुर। शहर में बंदरों की बढ़ती समस्या से परेशान लोगों को अब नगर निगम से राहत मिलना मुश्किल हो गया है। शासन के निर्देश के बाद नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने का कार्य बंद कर दिया है और इस काम में लगी एजेंसी को भी रोक दिया गया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में शहर में बंदरों का उत्पात फिर से बढ़ सकता है। वहीं वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में उन्हें अब तक कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
जानकारी के अनुसार विशेष सचिव कल्याण बनर्जी की ओर से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि बंदरों के प्रबंधन की जिम्मेदारी पूर्ववत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के माध्यम से ही निभाई जाएगी। इसके लिए एक माह के भीतर कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत करने को कहा गया है। शासन स्तर से निर्देश जारी होने के बाद नगर निगम ने एजेंसी को बंदरों को पकड़ने के कार्य से हटा दिया।
पिछले वर्ष नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश पर नगर निगम ने शहर में बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू कराया था। इसकी वजह यह थी कि वन विभाग के जिम्मे होने के बावजूद लंबे समय तक यह कार्य प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहा था। बंदरों की संख्या लगातार बढ़ने से आम नागरिकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। कई इलाकों में बंदरों के हमले, घरों में घुसकर सामान नुकसान पहुंचाने और बच्चों व बुजुर्गों के घायल होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। नगर आयुक्त के पास शिकायतें पहुंच रही थीं और लोग समस्या से निजात की मांग कर रहे थे।

नगर निगम के स्तर पर जब यह जिम्मेदारी संभाली गई तो कुछ क्षेत्रों में राहत जरूर मिली। चुनिंदा स्थानों से बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा गया, जिससे नागरिकों को अस्थायी राहत मिली। एजेंसी के दावों के मुताबिक मार्च 2025 में टेंडर जारी होने के बाद से अब तक 5000 से अधिक बंदरों को पकड़ा गया। इस अभियान के तहत नगर निगम को साल भर में लाखों रुपये खर्च करने पड़े। बताया गया कि एक बंदर को पकड़ने पर 825 रुपये तक का खर्च आता था।
इससे पहले बंदर पकड़ने को लेकर वन विभाग और नगर निगम के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर खींचतान भी सामने आती रही है। कई बार यह विवाद उठा कि बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी किस विभाग की है। इसी असमंजस के कारण लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती थी और आम जनता को परेशानी उठानी पड़ती थी। अब शासन के ताजा आदेश के बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौटने की आशंका जताई जा रही है। नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब वह बंदर पकड़ने का कार्य नहीं करेगा और जिम्मेदारी पूरी तरह वन विभाग की होगी।
अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने कहा कि शासन के निर्देश के बाद नगर निगम बंदरों को नहीं पकड़ेगा और एजेंसी को रोक दिया गया है। शासन स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि वन्यजीवों से जुड़े मामलों को विशेषज्ञता के साथ वन विभाग ही बेहतर ढंग से संभाल सकता है। वहीं डीएफओ विकास यादव ने बताया कि शासन की ओर से अभी कोई आदेश नहीं आया है। कोर्ट के आदेश पर शासन में बैठक हुई थी, जिसमें तय हुआ है कि वन विभाग कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत करेगा, इसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
