वाराणसी
दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं के लिए अब विशालाक्षी मंदिर में दर्शन करना होगा आसान
मंदिर के विस्तारीकरण के साथ विश्वनाथ कॉरिडोर से मिलने की तैयारी

वाराणसी। दक्षिण भारतीयों के लिए तीन मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसमें कांची में कामाक्षी मंदिर, मदुरई में मीनाक्षी मंदिर और काशी में विशालाक्षी मंदिर। इन तीनों स्थानों पर ऐसी मान्यता है कि, यहां पर सती के अंग गिरे थे जिसके कारण यह तीनों स्थान शक्तिपीठ के रूप में परिवर्तित हो गए।

इधर जब से विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण हुआ है तब से पूरे देश और दुनिया के लोगों के लिए विश्वनाथ मंदिर के प्रति आस्था और बढ़ गई है और प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने के लिए आ रहे हैं।
कॉरिडोर से सटा हुआ विशालाक्षी देवी का मंदिर है लेकिन अभी मंदिर तक जाने में सुगम रास्ता नहीं है, पतली गली है। जिसके कारण भीड़-भाड़ अधिक होने पर लोगों को परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में अब विशालाक्षी मंदिर का आकार बढ़ाने और उसका विस्तार करने के साथ-साथ उसे विश्वनाथ कॉरिडोर से मिलाकर एकीकरण करने की व्यवस्था है ताकि जो भी श्रद्धालु विशालाक्षी मंदिर में दर्शन-पूजन करने आयें तो वह सीधे आसानी से विश्वनाथ मंदिर में भी दर्शन-पूजन कर सकें। इसका ब्लूप्रिंट तैयार हो चुका है और उम्मीद है की लोकसभा चुनाव के बाद इस पर काम शुरू भी हो जाएगा।

इस संबंध में विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि, अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद विशालाक्षी मंदिर तक श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक विस्तार की योजना है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह स्वागत योग्य कदम है। मंदिर का महंत होने के नाते में इस योजना का पूरा समर्थन करता हूं और इस फैसले के साथ हूं।
ज्ञातव्य है कि, विशालाक्षी मंदिर का विश्वनाथ कॉरिडोर तक विस्तार होने के बाद मां विशालाक्षी के मंदिर में श्रद्धालुओं की और भीड़ बढ़ेगी। अभी इस लिहाज से मंदिर का परिसर काफी छोटा है।
