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टकसाल सिनेमा शूटआउट केस : धनंजय सिंह ने उठाई आरोपियों को दंडित करने की मांग 

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वाराणसी/जौनपुर। वाराणसी में पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर वर्ष 2002 में हुए जानलेवा हमले के बहुचर्चित मामले में गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) यजुर्वेद्र विक्रम सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पूर्व सांसद धनंजय सिंह स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुए और एक बार फिर आरोपियों को दंडित किए जाने की मांग की। यह मामला बीते लगभग 24 वर्षों से न्यायालय में लंबित है और शहर के सबसे पुराने मामलों में शामिल माना जाता है।

इससे पूर्व एमएलसी विनीत सिंह अपनी गवाही और जिरह पूरी कर चुके हैं। अदालत ने अब विधायक अभय सिंह को पुनः तलब किया है। साथ ही शेष अभियुक्तों में अभय सिंह, संदीप सिंह और संजय सिंह रघुवंशी को भी आगे की जिरह के लिए बुलाए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। धनंजय सिंह की ओर से धारा 311 के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बचाव पक्ष के गवाहों और साक्ष्यों पर सवाल उठाए गए, जिसके बाद अदालत ने पुनः जिरह की अनुमति दी है।

अभियोजन पक्ष तथा धनंजय सिंह के अधिवक्ता ने एमएलसी विनीत सिंह से संबंधित बहस पूरी कर ली है। वहीं अधिवक्ता शशिकांत राय उर्फ ‘चुवा राय’ ने आरोप लगाया कि कुछ अभियुक्त जिरह से बचने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे मुकदमे के निस्तारण में विलंब हो रहा है। अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि अब गवाहों की जिरह किसी भी स्थिति में टाली नहीं जाएगी।

मामले में पुलिस द्वारा पूर्व में दाखिल आरोप पत्र में विधायक अभय सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह, सत्येंद्र सिंह तथा एमएलसी श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने का उल्लेख किया गया था। चार्जशीट दाखिल हुए भी दो दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मुकदमे का अंतिम निस्तारण अभी तक नहीं हो सका है।

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पूर्व सांसद की ओर से यह भी कहा गया कि वे पिछले 24 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं बचाव पक्ष की ओर से कुछ अभियुक्तों की बहस पूरी हो चुकी है, जबकि अभय सिंह, संदीप सिंह और संजय सिंह रघुवंशी की ओर से बहस लंबित है, जिससे प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

अदालत में हाल ही में अभय सिंह के अलिबाई से जुड़े गवाहों डॉ. अरविंद कुमार सिंह और फार्मासिस्ट सुभाकर यादव की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई थी, जिनकी जिरह पूरी कर ली गई है। बचाव पक्ष का दावा है कि घटना के समय अभय सिंह फैजाबाद के एक सरकारी अस्पताल में उपचाररत थे, जबकि अभियोजन पक्ष ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं।

घटना 4 अक्टूबर 2002 की है, जब धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ वाराणसी से जौनपुर लौट रहे थे। उस समय वे जौनपुर की रारी सीट से निर्दलीय विधायक थे। आरोप है कि कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास बोलेरो सवार अभय सिंह और उनके साथियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर और चालक सहित कई लोग घायल हो गए थे, जबकि हमलावर मौके से फरार हो गए थे।

इस मामले में धनंजय सिंह ने अभय सिंह, विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय रघुवंशी, विनोद सिंह और सत्येंद्र सिंह बबलू समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने कुछ आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी।

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के कारण इस मामले में लंबे समय तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका। 29 अगस्त 2025 को संबंधित गैंगस्टर एक्ट प्रकरण में आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया, जिसके बाद इस मुख्य मामले में पुनः सुनवाई और बहस की प्रक्रिया शुरू हो पाई है।

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अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह न्यायालय के सबसे पुराने लंबित मामलों में से एक है, अतः अब इसमें अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। वर्तमान में मामला अंतिम बहस के चरण में है और निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।। वाराणसी में पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर वर्ष 2002 में हुए जानलेवा हमले के बहुचर्चित मामले में गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) यजुर्वेद्र विक्रम सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पूर्व सांसद धनंजय सिंह स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुए और एक बार फिर आरोपियों को दंडित किए जाने की मांग की। यह मामला बीते लगभग 24 वर्षों से न्यायालय में लंबित है और शहर के सबसे पुराने मामलों में शामिल माना जाता है।

इससे पूर्व एमएलसी विनीत सिंह अपनी गवाही और जिरह पूरी कर चुके हैं। अदालत ने अब विधायक अभय सिंह को पुनः तलब किया है। साथ ही शेष अभियुक्तों में अभय सिंह, संदीप सिंह और संजय सिंह रघुवंशी को भी आगे की जिरह के लिए बुलाए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। धनंजय सिंह की ओर से धारा 311 के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बचाव पक्ष के गवाहों और साक्ष्यों पर सवाल उठाए गए, जिसके बाद अदालत ने पुनः जिरह की अनुमति दी है।

अभियोजन पक्ष तथा धनंजय सिंह के अधिवक्ता ने एमएलसी विनीत सिंह से संबंधित बहस पूरी कर ली है। वहीं अधिवक्ता शशिकांत राय उर्फ ‘चुवा राय’ ने आरोप लगाया कि कुछ अभियुक्त जिरह से बचने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे मुकदमे के निस्तारण में विलंब हो रहा है। अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि अब गवाहों की जिरह किसी भी स्थिति में टाली नहीं जाएगी।

मामले में पुलिस द्वारा पूर्व में दाखिल आरोप पत्र में विधायक अभय सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह रघुवंशी, विनोद सिंह, सत्येंद्र सिंह तथा एमएलसी श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने का उल्लेख किया गया था। चार्जशीट दाखिल हुए भी दो दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मुकदमे का अंतिम निस्तारण अभी तक नहीं हो सका है।

पूर्व सांसद की ओर से यह भी कहा गया कि वे पिछले 24 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं बचाव पक्ष की ओर से कुछ अभियुक्तों की बहस पूरी हो चुकी है, जबकि अभय सिंह, संदीप सिंह और संजय सिंह रघुवंशी की ओर से बहस लंबित है, जिससे प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

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अदालत में हाल ही में अभय सिंह के अलिबाई से जुड़े गवाहों डॉ. अरविंद कुमार सिंह और फार्मासिस्ट सुभाकर यादव की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई थी, जिनकी जिरह पूरी कर ली गई है। बचाव पक्ष का दावा है कि घटना के समय अभय सिंह फैजाबाद के एक सरकारी अस्पताल में उपचाररत थे, जबकि अभियोजन पक्ष ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं।

घटना 4 अक्टूबर 2002 की है, जब धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ वाराणसी से जौनपुर लौट रहे थे। उस समय वे जौनपुर की रारी सीट से निर्दलीय विधायक थे। आरोप है कि कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास बोलेरो सवार अभय सिंह और उनके साथियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर और चालक सहित कई लोग घायल हो गए थे, जबकि हमलावर मौके से फरार हो गए थे।

इस मामले में धनंजय सिंह ने अभय सिंह, विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय रघुवंशी, विनोद सिंह और सत्येंद्र सिंह बबलू समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने कुछ आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी।

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के कारण इस मामले में लंबे समय तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका। 29 अगस्त 2025 को संबंधित गैंगस्टर एक्ट प्रकरण में आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया, जिसके बाद इस मुख्य मामले में पुनः सुनवाई और बहस की प्रक्रिया शुरू हो पाई है।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह न्यायालय के सबसे पुराने लंबित मामलों में से एक है, अतः अब इसमें अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। वर्तमान में मामला अंतिम बहस के चरण में है और निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

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