चन्दौली
जैन धर्म हमेशा पांच मार्गो पर चलता है : जैनाचार्य
चहनियां (चंदौली)। जिले के दुर्गावती, सैयदराजा होते हुए जैन धर्म का पदयात्रा दल शुक्रवार को बलुआ स्थित बाल्मीकि इंटर कॉलेज पहुँचा। यहाँ प्रवास करते हुए दल ने धर्म के प्रति लोगों को जागरूक किया। जो श्रद्धालु पदयात्रा में चलने में असमर्थ थे, वे बंगही से पहुँचे। दल के जैनाचार्य मुक्ति प्रभसूरी जी महाराज ने प्रवास के दौरान बताया कि यह पदयात्रा झारखंड से आरंभ हुई है और वाराणसी के सारनाथ में समाप्त होगी। सारनाथ जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभ स्वामी की पवित्र भूमि है।
जैनाचार्य मुक्ति प्रभसूरी जी ने बताया कि जैन धर्म का मुख्य उद्देश्य संसारिक दुखों को सहन करते हुए मोक्ष प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोग धन के पीछे भाग रहे हैं, जबकि सच्ची शांति मोक्ष में है। जैन साधु जब संन्यास जीवन को स्वीकार करते हैं, तो प्रमुख प्रतिज्ञाएँ लेते हैं:
1. किसी भी जीव को न मारना और न ही मरवाना।
2. झूठ न बोलना और न किसी से झूठ बोलने को कहना।
3. झूठ बोलने वालों को रोकना।
4. बिना अनुमति के किसी की वस्तु न लेना।
गच्छ नायक का निधन, चंदौली में दी गई श्रद्धांजलि
प्रवास के दौरान गुरुवार को जैन समाज को गहरा दुःख सहना पड़ा, जब चंदौली में सबसे बड़े संत रामचंद्र सूरी समुदाय के गच्छ नायक, 2000 संतों के गुरु जैनाचार्य पुण्ड पाल सूरी जी का मुंबई में निधन हो गया। इस दुखद घटना पर चंदौली में समाधि पूर्वक शोक संवेदना व्यक्त की गई।
सारनाथ के लिए होगा प्रस्थान
दल शनिवार को वाराणसी के सारनाथ के लिए प्रस्थान करेगा। पदयात्रा में जैन संतों के प्रवास और कार्यक्रमों के सफल आयोजन में बाल्मीकि इंटर कॉलेज के पुनिल सिंह, प्रमोद सिंह, जुगनू मिश्रा, और जीतू निषाद ने व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
